मई का महीना और मार्च जैसी ठंड! कानपुर में इस बार मौसम ने ऐसा पलटा खाया है कि पिछले 39 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है। आमतौर पर झुलसा देने वाली गर्मी के लिए पहचाने जाने वाले मई में, कानपुर ने ऐसी सर्दी का अनुभव किया है जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की होगी। यह मौसम का एक ऐसा बदलाव है जिसने सबको चौंका दिया है और शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
कैसे टूटा 39 साल का रिकॉर्ड?
4 मई, 2026 को कानपुर में अधिकतम तापमान सिर्फ 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह आंकड़ा पिछले 39 वर्षों में इस तारीख का सबसे कम तापमान है। इससे पहले, इतनी कम गर्मी 4 मई, 1987 को महसूस की गई थी, जब पारा 30 डिग्री पर था।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA University) के मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 56 सालों में यह 16वीं बार है जब मई के महीने में अधिकतम तापमान 28 से 31 डिग्री के बीच रहा है। यह अपने आप में एक दुर्लभ घटना है।
मई का मिजाज: कब कितना रहा तापमान?
मौसम विभाग के पास वर्ष 1971 से मई महीने के तापमान के विस्तृत आंकड़े मौजूद हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, मई में अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक गया है, जबकि सबसे नीचे यह 28 डिग्री तक आया है।
- सर्वाधिक अधिकतम तापमान: 25 मई, 1984 को पहली बार 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके बाद, वर्ष 1988 में 26 से 30 मई तक पारा लगातार 47 डिग्री पर बना रहा।
- सर्वाधिक न्यूनतम तापमान (रात का): 30 मई, 1975 को रात का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
- सबसे कम न्यूनतम तापमान (रात का): 4 मई, 1992 को रात का तापमान सबसे नीचे 16 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था।
मई महीने का औसत अधिकतम तापमान 40 डिग्री और औसत न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री रहता है। वहीं, मई की औसत वर्षा 17.4 मिमी दर्ज की जाती है। इस साल, 1 मई को ही 6.3 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो इस असामान्य मौसम का एक संकेत है।
आगे क्या? मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अप्रत्याशित ठंड की मुख्य वजह बादल और तेज हवाएं हैं। एकीकृत प्रादेशिक पूर्वानुमान केंद्र लखनऊ के प्रभारी वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अतुल सिंह का अनुमान है कि मई के महीने में तापमान अभी और नीचे गिर सकता है, और अधिक ऊपर भी चढ़ सकता है। यानी, इस महीने में मौसम कई रंग दिखा सकता है।
उन्होंने बताया कि मौसम में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक जलवायु परिवर्तन और स्थानीय मौसमी घटनाओं का मिला-जुला परिणाम हो सकता है। कानपुर के लोगों को इस पूरे महीने मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार रहना होगा।
कानपुर के लिए मायने और प्रभाव
कानपुर में मई के महीने में इस तरह की ठंड केवल एक मौसम की खबर नहीं है, बल्कि इसके गहरे मायने और प्रभाव हैं, खासकर आम जनता के लिए:
- गर्मी से राहत: सबसे सीधा और तात्कालिक प्रभाव यह है कि लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। कूलर और एसी की जरूरत कम हुई है, जिससे बिजली की खपत भी प्रभावित हो सकती है।
- स्वास्थ्य पर असर: अचानक बदले मौसम से सर्दी, खांसी और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।
- कृषि पर प्रभाव: कृषि क्षेत्र में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। कुछ फसलों के लिए यह तापमान अनुकूल हो सकता है, जबकि कुछ अन्य के लिए नुकसानदायक। किसानों को अपनी फसलों की निगरानी करनी होगी।
- व्यापार और अर्थव्यवस्था: गर्मी से जुड़े व्यवसायों, जैसे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और एयर कंडीशनर की बिक्री पर असर पड़ सकता है। वहीं, चाय-पकौड़े जैसे गर्म चीजों की बिक्री में इजाफा देखा जा सकता है।
- पर्यावरण संकेत: यह असामान्य मौसम पैटर्न जलवायु परिवर्तन के व्यापक संकेतों में से एक हो सकता है। यह हमें पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनने की याद दिलाता है।
कानपुर के लोगों को इस बदलते मौसम के साथ तालमेल बिठाना होगा। यह घटना हमें दिखाती है कि प्रकृति के मिजाज को समझना और उसके अनुरूप तैयार रहना कितना महत्वपूर्ण है।
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