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सीएम योगी बोले: ‘बाल मेरे जैसे रखिए, रवि किशन की नकल नहीं!’ – मानद PhD पर भी ली चुटकी

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखपुर में होते हैं, मंच पर सांसद रवि किशन के साथ उनकी नोंक-झोंक और हंसी-मजाक देखने लायक होता है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने बच्चों को एक ऐसी सलाह दे डाली, जिसे सुनकर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। उन्होंने कहा, ‘बाल मेरे जैसे छोटे रखिए, रवि किशन की नकल करने की ज़रूरत नहीं!’

यह सिर्फ बालों तक ही सीमित नहीं रहा। सीएम योगी ने रवि किशन की मानद पीएचडी की उपाधि पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि इस डिग्री से उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी, न ही वे ‘प्रोफेसर’ या ‘डॉक्टर’ लिख सकते हैं। यह सब कुछ बड़े ही हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया, जो गोरखपुर की राजनीति में इन दोनों नेताओं के बीच के अनोखे संबंध को दर्शाता है।

‘बाल मेरे जैसे रखिए, रवि किशन की नकल नहीं!’

गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों से सीधे मुखातिब थे। उन्होंने बड़े प्यार से बच्चों से अपील की कि वे अपने बाल करीने से बनाकर आएं। इसी दौरान उन्होंने सांसद रवि किशन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘रवि किशन की नकल करने की आवश्यकता नहीं है कि बड़े-बड़े बाल बनाकर रखें। छोटे बाल बनाइए, मेरी तरह छोटे-छोटे बाल होने चाहिए।’

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए सीएम योगी ने एक किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार वे गोरखपुर में ही एक तीन साल के बच्चे के मुंडन संस्कार में गए थे। उन्होंने बच्चे से पूछा, ‘तुम्हारे बाल सब कट गए?’ बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया, ‘नहीं-नहीं, कटे नहीं हैं। मैं तो आपकी तरह दिखने के लिए अपना बाल बनवाया हूं।’ इस बात पर मंच पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। सीएम योगी ने बच्चों को समझाया कि अगर उन्हें सही बातें सिखाई जाएं, जैसे नाखून साफ रखना और बाल ठीक रखना, तो वे ज़रूर मानते हैं।

मानद PhD पर भी नहीं बख्शा रवि किशन को

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रवि किशन को सिर्फ उनके हेयरस्टाइल पर ही नहीं छेड़ा, बल्कि उनकी मानद पीएचडी की डिग्री को लेकर भी खूब मजाक किया। उन्होंने बताया कि एक बार रवि किशन उनके पास आए और शिकायत की कि उन्होंने उन्हें पीएचडी मिलने की बधाई नहीं दी।

सीएम योगी ने हंसते हुए कहा, ‘मैंने कहा काहे की बधाई? कहा कि मुझे पीएचडी की उपाधि मिली है। हमने कहा कि वह मानद उपाधि है। यह कह रहे हैं कि मैं प्रोफेसर लिखूंगा। अरे हमने कहा प्रोफेसर लिख नहीं सकते आप। वह मानद उपाधि है। आप उस डिग्री को लेकर के जाएंगे तो आपको उसके नाम पर नौकरी नहीं मिलनी है। आप केवल उसको टांग सकते हैं अपने साथ में।’ उन्होंने आगे मज़ाक में कहा कि अगर रवि किशन उस डिग्री को गले में टांग कर कहीं उपचार करने चले गए तो क्या होगा, क्योंकि उन्होंने ‘असली’ पीएचडी नहीं की है।

मायने और प्रभाव

यह घटना सिर्फ एक हल्के-फुल्के मजाक से कहीं बढ़कर है, खासकर गोरखपुर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में।

  • आम जनता से जुड़ाव: सीएम योगी का यह अंदाज उन्हें आम जनता के और करीब लाता है। उनके सहज और विनोदी स्वभाव की झलक लोगों को भाती है। यह दिखाता है कि नेता सिर्फ गंभीर मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की बातों पर भी जनता से जुड़ सकते हैं।
  • राजनीतिक सौहार्द: सांसद रवि किशन के साथ उनकी यह जुगलबंदी गोरखपुर की राजनीति में एक अनूठा सौहार्द दर्शाती है। यह दिखाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, व्यक्तिगत स्तर पर नेता एक-दूसरे के साथ सहज और दोस्ताना संबंध साझा कर सकते हैं।
  • मानद उपाधि पर स्पष्टता: मानद पीएचडी पर की गई टिप्पणी ने अनजाने में ही सही, लोगों को मानद उपाधि और वास्तविक शोध-आधारित पीएचडी के बीच का अंतर समझाया। यह एक तरह से जन जागरूकता का काम भी करता है।
  • व्यक्तिगत ब्रांडिंग: सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी सादगी और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं। बच्चों को अपने जैसे छोटे बाल रखने की सलाह उनकी इस छवि को और मजबूत करती है, जबकि रवि किशन का फिल्मी अंदाज और लंबे बाल उनकी अलग पहचान है।

कुल मिलाकर, गोरखपुर में हुई यह घटना न केवल हंसी और मनोरंजन का स्रोत बनी, बल्कि इसने नेताओं के मानवीय पक्ष और उनके आपसी संबंधों की एक दिलचस्प तस्वीर भी पेश की।

Image Source: hindi.news18.com

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