अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की चमक अचानक फीकी पड़ गई है। जो कीमती धातुएं कुछ दिन पहले तक रॉकेट की रफ्तार से आसमान छू रही थीं, अब उनकी कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। इस अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है और हर कोई इसके पीछे की वजह जानना चाहता है।
पिछले कुछ हफ्तों से भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के चलते सोने-चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। लेकिन अब अचानक हालात बदल गए हैं। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज जलसंधि को लेकर स्पष्टता की कमी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है।
इस अनिश्चितता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो फिर से बढ़ने लगी हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई का डर और गहरा गया है। कीमती धातुओं के बाजार पर इसका सीधा असर दिख रहा है, जहां दामों में बड़े पैमाने पर उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।
सोने-चांदी के दाम में अचानक क्यों आई गिरावट?
सप्ताह की शुरुआत में सोने के दाम में जोरदार उछाल देखा गया था, लेकिन उसके बाद स्थिति पूरी तरह से पलट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक समय प्रति औंस $4,750 के स्तर तक पहुंचने वाला सोना, अब गिरकर लगभग $4,556 के स्तर पर आ गया है। एक ही दिन में सोने के दाम में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे साप्ताहिक नुकसान कुल 3% तक पहुंच गया।
चांदी के बाजार में तो और भी तीव्र बदलाव देखने को मिले हैं। कई विश्लेषकों ने शुरुआत में चांदी के दाम प्रति औंस $90 तक पहुंचने की भविष्यवाणी की थी। लेकिन पिछले दो कारोबारी सत्रों में चांदी बुरी तरह लुढ़क गई है।
मौजूदा समय में $77 पर कारोबार कर रही चांदी के दाम में एक ही दिन में 7.5% की भारी गिरावट आई है। इससे सप्ताह के अंत तक कुल 4% का नुकसान दर्ज किया गया है।
जेपी मॉर्गन की भविष्यवाणी: क्या $5,000 का लक्ष्य होगा पूरा?
दुनिया की जानी-मानी वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने एक चौंकाने वाला अनुमान लगाया है। उनके मुताबिक, साल 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम प्रति औंस $5,000 तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही डिजिटल गोल्ड टोकन PAX गोल्ड (PAXG) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
विश्व गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट भी इस बात का समर्थन करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 244 टन सोना खरीदा है, जो सोने में उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति का असर
सोने और चांदी के दाम पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ब्याज दरों की उम्मीदों से आ रहा है। अमेरिका में महंगाई एक बार फिर तेजी से बढ़ रही है, जिससे फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों में निवेशकों की रुचि कम हो जाती है। वे अधिक रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर मुड़ जाते हैं, जिससे सोने की मांग घटती है और दाम पर दबाव पड़ता है।
अमेरिका द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 3.8% तक पहुंच गया है। मुख्य महंगाई दर बाजार की उम्मीदों से कहीं ज्यादा दर्ज की गई है। इसके अलावा, उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) भी 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर है। ईंधन सहित अन्य क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे आर्थिक मंदी का डर गहरा रहा है।
इसी समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का मजबूत होना भी सोने के दाम पर नकारात्मक असर डाल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर सोने के दाम $4,500 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर को तोड़ते हैं, तो यह $4,400 तक गिर सकता है।
मायने और प्रभाव
सोने और चांदी के दाम में आया यह उतार-चढ़ाव सिर्फ निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी कई मायने रखता है। भारत में सोने को सिर्फ आभूषण के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देखा जाता है। शादियों और त्योहारों के सीजन में सोने की खरीदारी भारतीय परिवारों का एक अहम हिस्सा होती है।
अगर सोने के दाम में स्थिरता नहीं रहती या वे अप्रत्याशित रूप से बढ़ते-घटते हैं, तो इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ता है। महंगाई की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों का प्रभाव भारत के शेयर बाजार और रुपये पर भी पड़ सकता है, जिससे आयात-निर्यात और घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक हालात, विशेषकर ईरान और मध्य-पूर्व के तनाव, कच्चे तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और अंततः सभी वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं। ऐसे में, यह वैश्विक हलचल हमारे दैनिक जीवन और आर्थिक भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इस अस्थिर बाजार में समझदारी से निवेश करें और विशेषज्ञों की सलाह लें।
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