कुशीनगर के पिपरा रज्जब में शुक्रवार की सुबह एक ऐसा भयानक मंजर सामने आया, जिसने रोंगटे खड़े कर दिए। फोरलेन पर धुएं के गुबार में छिपी मौत ने एक परिवार को अपनी चपेट में ले लिया। नगर पंचायत की घोर लापरवाही से जलते कूड़े के ढेर से उठे जहरीले धुएं ने दृश्यता इतनी कम कर दी कि एक तेज रफ्तार ट्रक ने बोलेरो को रौंद डाला। इस हादसे में एक गर्भवती महिला सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी हालत नाजुक बनी हुई है। यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की अनदेखी का जीता-जागता सबूत है।
मंदिर से लौट रहे परिवार पर टूटा कहर
मिली जानकारी के अनुसार, तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के मठिया भोकरिया गांव के निवासी गोविंद यादव अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ कुलकुला देवी मंदिर में दर्शन-पूजन करने गए थे। बोलेरो गाड़ी में उनके साथ बबलू यादव, गोविंद यादव और रीमा यादव (जो गर्भवती हैं) सवार थीं। सभी लोग दर्शन के बाद खुशी-खुशी अपने घर लौट रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि रास्ते में लापरवाही का धुआं उनका इंतजार कर रहा है।
जैसे ही उनकी बोलेरो पिपरा रज्जब के पास कुशीनगर फोरलेन पर पहुंची, अचानक चारों तरफ घना धुआं छा गया। यह धुआं सड़क किनारे नगर पंचायत द्वारा गिराए गए कूड़े के ढेर में लगाई गई आग से उठ रहा था। इस जहरीले और घने धुएं के कारण हाईवे पर दृश्यता लगभग शून्य हो गई।
धुंध में छिपी टक्कर, पलटी बोलेरो
सामने कुछ भी साफ न दिखने के कारण बोलेरो चालक ने एहतियातन गाड़ी की रफ्तार कम की और ब्रेक लगाया। तभी पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रक ने बोलेरो को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो डिवाइडर तोड़ती हुई दूसरी लेन में जा गिरी और पलट गई।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। गाड़ी के भीतर फंसे लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे। हाईवे पर मौजूद स्थानीय राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
चीख-पुकार और मुश्किल बचाव
पुलिस टीम ग्रामीणों की मदद से मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद, बोलेरो की खिड़कियों और दरवाजों को तोड़कर भीतर फंसे घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तुरंत एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) फाजिलनगर ले जाया गया।
घायलों, खासकर गर्भवती महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल, रवींद्रनगर धूस रेफर कर दिया है। दुर्घटना के कारण फोरलेन पर काफी देर तक जाम की स्थिति बनी रही, जिसे पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को क्रेन से हटवाकर बहाल कराया।
स्थानीय जनता का फूटा गुस्सा: ‘यह हादसा नहीं, हत्या की कोशिश है!’
इस भीषण हादसे के बाद पिपरा रज्जब और आसपास के ग्रामीणों में नगर पंचायत प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि यह कोई सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि नगर पंचायत की घोर लापरवाही का सीधा नतीजा है। उनकी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
- ग्रामीणों का आरोप है कि फोरलेन के किनारे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर लगातार कूड़ा गिराया जा रहा है।
- इस कूड़े के निस्तारण की बजाय इसमें सीधे आग लगा दी जाती है, जिससे उठने वाला जहरीला धुआं हाईवे पर चलने वाले ड्राइवरों के लिए ‘मौत का जाल’ बन जाता है।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि इस धुएं के कारण पहले भी कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
- नगर पंचायत को इस संबंध में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
मायने और प्रभाव: कब जागेगा प्रशासन?
कुशीनगर में हुआ यह दर्दनाक हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की गंभीर लापरवाही का नतीजा है। नगर पंचायत की जिम्मेदारी सिर्फ कूड़ा उठाना नहीं, बल्कि उसका सही तरीके से निस्तारण करना भी है, ताकि आम जनता की जान खतरे में न पड़े। फोरलेन जैसी महत्वपूर्ण सड़क के किनारे कूड़ा जलाना, जहां गाड़ियां तेज रफ्तार से चलती हैं, सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ अधिकारियों की अनदेखी और नियमों की अवहेलना, बेगुनाह लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
इस हादसे का सीधा असर स्थानीय जनता के जीवन पर पड़ता है। एक तरफ घायलों का परिवार सदमे में है और इलाज के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आम लोग भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस घटना से यह सवाल उठता है कि कब तक ऐसे छोटे शहरों और कस्बों में प्रशासनिक लापरवाही जानलेवा बनी रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या इस घटना से सबक लेकर ठोस कदम उठाएगा? यह समय है जब जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए और कूड़ा प्रबंधन के लिए स्थायी और सुरक्षित समाधान तलाशे जाएं, ताकि कुशीनगर के फोरलेन पर ‘लापरवाही का धुआं’ फिर कभी किसी के लिए काल न बने।



