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अयोध्या में यूपी STF का बड़ा एक्शन: 40+ मुकदमों वाला कुख्यात भानु प्रताप सिंह एनकाउंटर में ढेर

उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ जारी योगी सरकार की मुहिम को एक और बड़ी सफलता मिली है। सूबे के सबसे खूंखार और लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात अपराधी भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू को यूपी एसटीएफ ने अयोध्या में एक मुठभेड़ में मार गिराया है। भानु प्रताप पर हत्या, लूट, डकैती और रंगदारी जैसे 40 से ज़्यादा संगीन मुकदमे दर्ज थे, और कई जिलों की पुलिस उसकी तलाश में थी।

कौन था भानु प्रताप सिंह: अपराधों का लंबा काला चिट्ठा

गोरखपुर जिले के बेलघाट थाना क्षेत्र के विखानपुर गांव का रहने वाला भानु प्रताप सिंह अपराध की दुनिया का एक बड़ा नाम था। वह सिर्फ गोरखपुर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि आजमगढ़, अंबेडकरनगर और अयोध्या जैसे कई जिलों में उसका खौफ था।

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि भानु प्रताप सिंह पर हत्या, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, डकैती, लूट और जबरन वसूली जैसे गंभीर धाराओं में 40 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। वह पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था और लंबे समय से कानून की गिरफ्त से दूर था।

इस खूंखार अपराधी पर अलग-अलग जोन और जिलों से कुल 1 लाख 65 हजार रुपये का इनाम घोषित था। एडीजी वाराणसी जोन ने 1 लाख, डीआईजी अयोध्या ने 50 हजार और अयोध्या के एसएसपी ने 15 हजार रुपये का इनाम रखा था, जो उसकी गंभीरता को दर्शाता है।

अयोध्या में कैसे हुआ एनकाउंटर?

रविवार देर रात, अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र में एसटीएफ को भानु प्रताप सिंह की मौजूदगी की सटीक सूचना मिली। एसटीएफ की टीम ने घेराबंदी की, जिसके बाद एमी घाट के पास बदमाशों से उनकी मुठभेड़ हो गई।

एसटीएफ निरीक्षक जेपी राय ने रात करीब 11 बजे महाराजगंज पुलिस को मुठभेड़ की जानकारी देते हुए मदद मांगी। मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने पाया कि मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों की एसटीएफ टीम से सीधी भिड़ंत हुई थी।

अस्पताल तक ले गई STF, फिर भी नहीं बची जान

मुठभेड़ के दौरान भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू को गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका दूसरा साथी हालांकि मौके से फरार होने में कामयाब रहा, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी है।

घायल भानु प्रताप को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई, लेकिन देर होने पर एसटीएफ की टीम खुद उसे लेकर अस्पताल पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज दर्शननगर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है यह खबर अहम?

भानु प्रताप सिंह जैसे कुख्यात अपराधी का एनकाउंटर होना उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश है। यह दिखाता है कि राज्य में अब अपराधियों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है।

  • अपराधियों में खौफ: इस तरह के एनकाउंटर से अन्य अपराधियों में पुलिस का खौफ बढ़ता है, जिससे आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगने की उम्मीद है।
  • जनता में विश्वास: लंबे समय से आतंक का पर्याय बने अपराधी के खात्मे से आम जनता में पुलिस और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है। उन्हें लगता है कि उनकी सुरक्षा के लिए सरकार और पुलिस गंभीर हैं।
  • कानून-व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: यह घटना उन पुलिसकर्मियों के मनोबल को भी बढ़ाती है जो दिन-रात अपराधियों का सामना करते हैं। यह राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • क्षेत्रीय शांति: गोरखपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर और अयोध्या जैसे जिलों में जहां भानु प्रताप का आतंक था, वहां की जनता अब राहत की सांस लेगी। कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और डकैती जैसे अपराधों में कमी आ सकती है।

यह एनकाउंटर सिर्फ एक अपराधी का अंत नहीं, बल्कि अपराध के खिलाफ एक मजबूत संकल्प का प्रतीक है, जो उत्तर प्रदेश को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में एक अहम कड़ी है।

Image Source: hindi.news18.com

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