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झारखंड में सियासी हलचल: वित्त मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने लौटा दी अपनी सुरक्षा, सरकारी गाड़ियों पर विवाद गहराया!

झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक ऐसी खबर सुर्खियां बटोर रही है, जिसने सबको चौंका दिया है। राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था वापस लौटा दी है। सरकारी गाड़ियों को लेकर अधिकारियों के साथ हुए विवाद के बाद मंत्री का यह कदम कई सवाल खड़े कर रहा है और राज्य के राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है। यह सिर्फ एक मंत्री की सुरक्षा लौटाने की बात नहीं, बल्कि नौकरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते टकराव का एक बड़ा संकेत भी है।

सुरक्षा लौटाने की पूरी कहानी

मामला तब गरमाया जब वित्त मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 पुलिसकर्मियों के लिए एक अतिरिक्त वाहन की मांग की। उनका तर्क था कि उनके पास मौजूद तीन गाड़ियों में सभी सुरक्षाकर्मी ठीक से नहीं बैठ पाते, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। हालांकि, अतिरिक्त गाड़ी देने के बजाय, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह ने मंत्री के निजी सचिव को एक नोटिस भेज दिया। इस नोटिस में 2022 के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि मंत्री को मिली तीन गाड़ियों में से एक पुलिस मुख्यालय को वापस की जाए।

अधिकारियों से विवाद की जड़

इस नोटिस से मंत्री राधा कृष्णा किशोर बेहद नाराज हो गए। उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से अपनी बेइज्जती बताया और 29 जून को डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी पूरी सुरक्षा टीम और उनके वाहनों को वापस कर दिया। अब उनके पास केवल वित्त विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई एक गाड़ी ही बची है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि राज्य में मंत्रियों और अधिकारियों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

मंत्री राधा कृष्णा किशोर का बेबाक बयान

मीडिया से बातचीत में मंत्री राधा कृष्णा किशोर ने अपनी सुरक्षा लौटाने की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने विवाद की पूरी वजह बताने से इनकार करते हुए कहा कि सही समय आने पर वह इसका खुलासा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा, “अगर जनता और मेरे मतदाता पूछेंगे तो मैं पूरी बात बताऊंगा। फिलहाल यह मामला मेरे, वित्त विभाग और पुलिस मुख्यालय के बीच का है। इसका मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कोई संबंध नहीं है।”

राधा कृष्णा किशोर ने अपनी सुरक्षा पर भगवान भरोसे की बात भी कही। उन्होंने पलामू जैसे संवेदनशील इलाके से आने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ का दौर देखा है। उनका मानना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा से ज्यादा ईश्वर पर भरोसा है। उन्होंने कहा, “जब तक ऊपर वाले ने जिंदगी लिखी है, कोई कुछ नहीं कर सकता। अगर मौत लिखी होगी तो सुरक्षा घेरे में भी कुछ हो सकता है।” उन्होंने जमशेदपुर की एक घटना का भी जिक्र किया, जहां कथित तौर पर पीसीआर वाहन से व्यक्ति को बाहर निकालकर हत्या कर दी गई थी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें बिहार की तरह बड़े सुरक्षा घेरे या कार्यकर्ताओं की भीड़ के साथ चलने की आवश्यकता महसूस नहीं होती।

मायने और प्रभाव: क्या कहते हैं ये सियासी संकेत?

झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्णा किशोर द्वारा अपनी सुरक्षा लौटाने का यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं।

  • नौकरशाही बनाम राजनीतिक नेतृत्व: यह घटना राज्य में नौकरशाही और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ती खाई को उजागर करती है। जब एक वरिष्ठ मंत्री की मांग को दरकिनार कर उन्हें ही गाड़ी वापस करने का फरमान सुनाया जाता है, तो यह प्रशासनिक प्रोटोकॉल और जनप्रतिनिधि के सम्मान के बीच के तनाव को दर्शाता है।
  • कांग्रेस कोटे के मंत्री का संदेश: राधा कृष्णा किशोर कांग्रेस कोटे से सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं। उनका यह कदम गठबंधन सरकार के भीतर भी किसी अंदरूनी खींचतान या असंतोष का संकेत हो सकता है। क्या यह सरकार के भीतर किसी बड़े बदलाव की आहट है?
  • जनता के बीच छवि: एक मंत्री का सार्वजनिक रूप से सुरक्षा लौटाना आम जनता के बीच उनकी छवि को प्रभावित कर सकता है। कुछ इसे स्वाभिमान का प्रतीक मानेंगे, तो कुछ इसे अनावश्यक विवाद का नाम देंगे। पलामू जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आने वाले मंत्री का सुरक्षा पर भगवान भरोसे की बात कहना एक मजबूत संदेश देता है।
  • प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता: यह घटना यह भी दर्शाती है कि सरकारी विभागों के बीच समन्वय और संवाद की कितनी कमी है। एक मंत्री की जायज मांग को इस तरह से खारिज करना और उन्हें अपमानित महसूस कराना, प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर देता है।

कुल मिलाकर, राधा कृष्णा किशोर का यह बोल्ड कदम झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ गया है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस घटना के क्या दूरगामी परिणाम सामने आते हैं और क्या यह विवाद सिर्फ गाड़ियों तक सीमित रहता है या इसके तार किसी बड़े राजनीतिक बदलाव से जुड़े हैं।

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