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आरव हत्याकांड: फिरोजाबाद कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, दरिंदे विराज को फांसी की सजा

फिरोजाबाद से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। डेढ़ साल के मासूम आरव की निर्मम हत्या के दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को जिला जज की अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला सिर्फ एक कानूनी कार्यवाही नहीं, बल्कि उस हर मां-बाप के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके कलेजे के टुकड़े को किसी दरिंदे ने छीनने की कोशिश की हो। अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए न्याय की एक मिसाल कायम की है।

शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में 30 मई 2026 को हुई इस हृदय विदारक घटना ने हर किसी को सन्न कर दिया था। मासूम आरव को 27 सेकंड के भीतर 8 बार सड़क पर पटक कर मौत के घाट उतार दिया गया था। शुक्रवार को जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने इस मामले में 41वें दिन ही फैसला सुनाकर त्वरित न्याय का संदेश दिया। दोषी विराज को फांसी के साथ 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

दरिंदगी की वो खौफनाक दास्तान

मासूम आरव की मां रति शर्मा का विवाह बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुआ था। पति से अनबन के चलते रति जनवरी 2026 से अपने मायके में रह रही थीं। 30 मई को वह अपनी मां पिंकी देवी के साथ एक वकील से मिलने शिकोहाबाद आई थीं।

यहीं पर रति की मुंह बोली मौसी के शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी स्थित घर सुमित का फुफेरा भाई विराज उर्फ जितेंद्र पाठक आ गया। उसने रति के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे रति ने ठुकरा दिया।

बस इसी बात से बौखलाए विराज ने खौफनाक साजिश रची। उसने आरव को टॉफी दिलाने के बहाने घर से 50 मीटर दूर सुनसान सड़क पर ले जाकर, रति से बदला लेने के लिए मासूम को बेरहमी से पटक-पटककर मार डाला।

कैसे पकड़ा गया कातिल?

यह दिल दहला देने वाली वारदात सड़क पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। यही फुटेज अदालत में सबसे बड़ा सबूत साबित हुआ। वारदात के बाद आरोपी बच्चे के शव को घर के दरवाजे पर फेंककर फरार हो गया था।

फिरोजाबाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के कुछ ही घंटों के भीतर रात में मुठभेड़ के दौरान आरोपी विराज को गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में पुलिस की गोली लगने से उसके पैर में चोट भी आई थी।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने दोषी विराज को सजा सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहियां पूरी तरह पुख्ता हैं। यह घटना दुर्लभ से दुर्लभतम और बेहद जघन्य श्रेणी की है, जिसमें अपराधी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जा सकता।

सजा सुनते ही दोषी विराज अदालत में फूट-फूटकर रोने लगा, लेकिन अब उसकी हैवानियत का हिसाब हो चुका था। मृत मासूम आरव की नानी पिंकी देवी ने इस फैसले पर संतोष जताया है।

मायने और प्रभाव

फिरोजाबाद की अदालत का यह फैसला समाज में एक मजबूत संदेश देता है। यह बताता है कि मासूमों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर हमारी न्याय व्यवस्था चुप नहीं रहेगी, बल्कि कठोरतम सजा सुनिश्चित करेगी।

आरव हत्याकांड में त्वरित न्याय और फांसी की सजा ने न केवल पीड़ित परिवार को कुछ हद तक राहत दी है, बल्कि ऐसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों में भी कानून का डर पैदा किया है। सीसीटीवी जैसी आधुनिक तकनीक ने कैसे न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई, यह भी इस केस से साफ होता है।

यह घटना हमें बच्चों की सुरक्षा के प्रति और अधिक जागरूक रहने की प्रेरणा देती है। शिकोहाबाद और पूरे फिरोजाबाद में इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है, लोग इसे न्याय की जीत मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसे फैसलों से भविष्य में मासूमों के प्रति दरिंदगी करने वालों को कड़ी चेतावनी मिलेगी।

Image Source: www.amarujala.com

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