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Dow Jones Moneycontrol: शेयर बाजार में दूसरे दिन भी गिरावट, HDFC बैंक और पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। मंगलवार (21 जुलाई, 2026) को मुंबई में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान पर बंद हुए। इस गिरावट की मुख्य वजह HDFC बैंक के निराशाजनक तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया में गहराता भू-राजनीतिक संकट रहा, जिसने वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता पैदा कर दी है।

बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का बढ़ना, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली ने बाजार में जोखिम भरी धारणा को मजबूत किया है। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना रहा है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजारों पर भी दिख रहा है।

30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 238.41 अंक यानी 0.31% गिरकर 77,470.11 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाले NSE निफ्टी में भी 50.80 अंकों यानी 0.21% की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,187.70 पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरा दिन था जब भारतीय बाजार में बिकवाली का दबाव हावी रहा।

HDFC बैंक का प्रदर्शन और निवेशकों की चिंता

बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ा हाथ HDFC बैंक का रहा, जिसके शेयर लगातार दूसरे दिन 2% से ज्यादा टूटे। बैंक के तिमाही नतीजों में मार्जिन फ्रंट पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न होने से निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ।

कौन चमके, कौन गिरे?

जहां एक ओर बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव दिखा, वहीं कुछ शेयर ऐसे भी रहे जिन्होंने बाजार को थोड़ी राहत दी। बजाज फिनसर्व 2.07% की बढ़त के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट, HCL टेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाइटन जैसे शेयरों में भी खरीदारी देखी गई, जिससे गिरावट कुछ हद तक थमी।

सेक्टोरल स्तर पर PSU बैंक, IT, एनर्जी और फाइनेंशियल सर्विसेज में गिरावट रही। हालांकि, मिडस्मॉल प्राइवेट बैंक, रियल्टी, कमोडिटीज और ऑटो सेक्टर में बढ़त दर्ज की गई, जिससे ब्रॉडर मार्केट (मिडकैप और स्मॉलकैप) में थोड़ी मजबूती बनी रही।

वैश्विक बाजार का रुख और कच्चे तेल का खेल

वैश्विक स्तर पर देखें तो एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई बढ़त पर बंद हुए, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग हल्का नीचे रहा। यूरोपीय बाजार बढ़त के साथ खुले, लेकिन अमेरिकी बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 0.66% बढ़कर 90.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंता का विषय है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में महंगाई को बढ़ावा दे सकती हैं।

मायने और प्रभाव: आम आदमी पर क्या असर?

शेयर बाजार की यह गिरावट सिर्फ बड़े निवेशकों या ट्रेडर तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है। आपके म्यूचुअल फंड, SIP और प्रोविडेंट फंड के निवेश पर इसका प्रभाव दिख सकता है। अगर बाजार में गिरावट जारी रहती है, तो आपके निवेश पोर्टफोलियो का मूल्य प्रभावित हो सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। पेट्रोल, डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आपकी मासिक बजट पर सीधा दबाव पड़ेगा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है, जिससे आयात और महंगा हो सकता है।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की अस्थिरता को देखते हुए धैर्य रखें और किसी भी जल्दबाजी वाले फैसले से बचें। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले लोगों को ऐसी गिरावट में अच्छी कंपनियों के शेयर खरीदने का मौका भी मिल सकता है, लेकिन सावधानी और गहन शोध बेहद जरूरी है। बाजार के रुझानों को समझने के लिए Dow Jones Moneycontrol जैसे विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

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