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गोरखपुर को मिलेगी दोहरी सौगात: सुथनी में कचरे से बनेगी गैस और खाद, IOCL का बड़ा कदम

गोरखपुर की गलियों से उठते कचरे के पहाड़ और किसानों की खाद-गैस की चिंता अब बीते दिनों की बात होने वाली है। शहर के सुथनी में एक ऐसा हाईटेक प्लांट लगने जा रहा है, जो इस समस्या को ‘सोने’ में बदल देगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और नगर निगम गोरखपुर की साझेदारी से यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब तेजी से जमीन पर उतरने को तैयार है।

गोरखपुर में कचरे का समाधान: सुथनी बनेगा मॉडल

गोरखपुर के सुथनी स्थित इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में कचरे से ऊर्जा और जैविक खाद बनाने की इस अनूठी पहल को रफ्तार मिल गई है। यह परियोजना न केवल शहर को स्वच्छ रखने में मदद करेगी, बल्कि ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाएगी।

इस परियोजना के तहत 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट स्थापित किया जाएगा। यह प्लांट गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर उसे उपयोगी उत्पादों में बदलेगा, जिससे पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

कैसे काम करेगा यह हाईटेक प्लांट?

यह अत्याधुनिक प्लांट हर दिन 200 टन गीले कचरे को प्रोसेस करेगा। इस प्रक्रिया से करीब 7 टन कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और लगभग 40 टन उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी।

CBG को वाहनों के ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी। वहीं, जैविक खाद किसानों के लिए वरदान साबित होगी, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएगी और रासायनिक खादों का विकल्प बनेगी।

IOCL और नगर निगम की साझेदारी

इस महत्वपूर्ण परियोजना को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) अपने विशेषज्ञता और निवेश के साथ आगे बढ़ा रहा है। नगर निगम गोरखपुर इस पहल में स्थानीय सहयोग और कचरा प्रबंधन का जिम्मा संभालेगा।

IOCL ने प्लांट के निर्माण के लिए आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है। चयनित निर्माण एजेंसी को इस पूरे प्लांट को अगले डेढ़ साल के भीतर तैयार करना होगा, जिसके बाद गोरखपुर एक नए हरित भविष्य की ओर अग्रसर होगा।

मायने और प्रभाव: गोरखपुर और आसपास के लिए क्यों अहम है यह प्लांट?

गोरखपुर के सुथनी में लगने वाला यह CBG प्लांट सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के लिए कई मायनों में गेमचेंजर साबित होगा। इसके दूरगामी परिणाम स्थानीय जनता और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे:

  • स्वच्छ शहर, स्वस्थ जीवन: शहर से निकलने वाले गीले कचरे का प्रभावी ढंग से निस्तारण होगा, जिससे कूड़े के पहाड़ कम होंगे, दुर्गंध से निजात मिलेगी और बीमारियों का खतरा घटेगा। यह सीधे तौर पर गोरखपुर की स्वच्छता रैंकिंग और नागरिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा।
  • ऊर्जा सुरक्षा में योगदान: प्लांट से पैदा होने वाली कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) एक स्वच्छ ईंधन है। इसे वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
  • किसानों को सस्ती और जैविक खाद: 40 टन जैविक खाद का उत्पादन किसानों के लिए बड़ी राहत लाएगा। उन्हें रासायनिक खादों के महंगे विकल्प से छुटकारा मिलेगा और वे अपनी फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए प्राकृतिक, गुणवत्तापूर्ण खाद का उपयोग कर पाएंगे। इससे मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुधरेगा।
  • रोजगार के अवसर: प्लांट के निर्माण और संचालन दोनों चरणों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देगा और युवाओं को आजीविका कमाने में मदद करेगा।
  • पर्यावरण संरक्षण: कचरे को लैंडफिल में डंप करने से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। इस प्रकार, यह प्लांट जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी अपना योगदान देगा और गोरखपुर के पर्यावरणीय संतुलन को बेहतर बनाएगा।

यह परियोजना गोरखपुर को कचरा प्रबंधन, ऊर्जा उत्पादन और कृषि विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी शहर के रूप में स्थापित करेगी, जो अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

Image Source: hindi.news18.com

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