लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों में धांधली और अनियमितताओं पर चुनाव आयोग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है। हाल ही में हुए MLC चुनावों में गड़बड़ियों के आरोपों के बाद आगरा में 6 चुनाव अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया गया है, जबकि गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर भी कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं।
चुनाव आयोग ने बीते 23 अक्टूबर को स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर हुए मतदान के दौरान सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लिया है। इन शिकायतों के आधार पर सोमवार को तत्काल प्रभाव से बड़े फैसले लिए गए।
आगरा में 6 अधिकारियों पर गिरी गाज
आगरा डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। विशेष रूप से पोलिंग स्टेशन 20, 21 और 26 पर पुनर्मतदान (री-पोल) के दौरान बरती गई लापरवाही और गड़बड़ियों ने चुनाव आयोग का ध्यान खींचा।
इन गड़बड़ियों के बाद, आयोग ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया। इसके तहत पोलिंग स्टेशन 21 और 26 पर तैनात कुल 6 सुपरवाइजरी अधिकारियों को तुरंत उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई बताती है कि आयोग किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।
गोरखपुर-फैजाबाद में ऑब्जर्वर क्यों बदले?
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भी एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां चुनाव पर्यवेक्षक (इलेक्शन ऑब्जर्वर) आईएएस अभय सिंह को उनकी ड्यूटी से अवमुक्त कर दिया गया है। उनके खिलाफ बीजेपी के बागी नेता व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
इन शिकायतों में अवैध खनन मामले में सीबीआई छापेमारी और अभय सिंह के आवास से नकदी बरामदगी जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। भारत निर्वाचन आयोग ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए 2007 बैच के आईएएस अधिकारी अभय सिंह को हटा दिया है। उनके स्थान पर 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का नया चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। आयोग ने नए प्रेक्षक को 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित मतगणना के लिए तुरंत अपनी रिपोर्ट पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
मायने और प्रभाव
चुनाव आयोग की यह ताबड़तोड़ कार्रवाई आम जनता के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, यह दर्शाता है कि आयोग चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। जब चुनाव अधिकारियों पर ही कार्रवाई होती है, तो इससे जनता का भरोसा और मजबूत होता है कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा रहे हैं।
दूसरे, यह उन सभी अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है जो अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतते हैं या किसी भी तरह की मिलीभगत में शामिल होते हैं। आगरा और गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुई यह कार्रवाई भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए एक मिसाल कायम करेगी। यह कदम लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करता है, जहां हर वोट मायने रखता है और हर चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इससे न केवल चुनावी प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी एक संदेश जाएगा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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