पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में मौत की अनिश्चित अफवाहों ने पूरे देश को बेचैन कर दिया है। एक पाकिस्तानी पत्रकार के चौंकाने वाले दावे ने इन अटकलों को और हवा दी है, जिसके बाद इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने सड़कों पर 20 लाख लोगों के उतरने की चेतावनी दे डाली है।
मामला तब गरमाया जब अमेरिकी में बसे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने दावा किया कि रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय (GHQ) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को डर है कि इमरान खान अब जीवित नहीं हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने दावे से पीछे हटते हुए कहा कि यह सिर्फ सेना के भीतर की आशंका थी।
इस बीच, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने दावा किया है कि उन्हें अपने नेता तक पहुंच नहीं दी जा रही है। पार्टी ने इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं और कहा है कि अगर उनसे मिलने नहीं दिया गया, तो 20 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और 14 साल की सजा काट रहे हैं। उनकी पत्नी बुशरा बीबी भी इसी मामले में जेल में हैं।
क्या वाकई जिंदा नहीं हैं इमरान खान? पत्रकार के दावे की सच्चाई
वजाहत सईद खान ने अपने यूट्यूब चैनल पर 10 अगस्त को यह सनसनीखेज दावा किया था। उन्होंने कहा था कि यह उनकी रिपोर्टिंग है, जो उन्हें GHQ के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली है। उनके अनुसार, तीन अधिकारियों ने व्यक्तिगत तौर पर यह आशंका जताई थी कि इमरान खान अब शायद जीवित नहीं हैं।
हालांकि, पत्रकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने इमरान खान को अपनी आंखों से नहीं देखा था, बल्कि यह उनकी आंतरिक आशंकाओं और सुनी-सुनाई बातों पर आधारित था। इस दावे ने पूरे पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ा दी है, खासकर पीटीआई कार्यकर्ताओं में।
इमरान खान नवंबर 2025 में भी जेल में अपनी मौत की अफवाहों का सामना कर चुके हैं। तब उनकी बहन उज्मा खानम ने आदियाला जेल में उनसे मुलाकात कर इन अफवाहों को खारिज किया था।
पीटीआई की ’20 लाख लोगों’ की चेतावनी और इस्लामाबाद मार्च
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और पीटीआई नेता सोहेल आफरीदी ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि अगर इमरान खान तक पहुंच नहीं दी गई, तो 20 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी में भारी गुस्सा है, जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा।
पीटीआई ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक ‘लॉन्ग मार्च’ का ऐलान किया है। पार्टी ने यह भी कहा है कि अगर इमरान खान के परिवार और डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया गया, तो इससे पहले भी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं।
आफरीदी ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ इमरान खान की रिहाई का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम और संस्थानों से जनता की नाराजगी का प्रतीक है। उनका मानना है कि पाकिस्तान इस समय भयानक स्थिति में है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता इमरान खान को अलग-थलग रखना है।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव: अमेरिकी सांसदों ने उठाई आवाज
इमरान खान की हिरासत को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। अमेरिकी कांग्रेस के 13 सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इमरान खान और बुशरा बीबी की हिरासत की शर्तों पर पाकिस्तान सरकार से सीधी बात करने का आग्रह किया है।
पत्र में संयुक्त राष्ट्र के यातना पर विशेष प्रतिवेदक एलिस जिल एडवर्ड्स की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इस रिपोर्ट में इमरान खान को लंबे समय तक एकांत कारावास में रखने और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।
अमेरिकी सांसदों ने इमरान खान की दाहिनी आंख को गंभीर नुकसान और उनकी 85% दृष्टि खोने के वकील के दावों का भी जिक्र किया है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से इस मामले में तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
इमरान खान और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच की रस्साकशी
इमरान खान की गिरफ्तारी और जेल में बंद रहना पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान, जिसका नेतृत्व फील्ड मार्शल असीम मुनीर कर रहे हैं, के साथ उनके बढ़ते टकराव का परिणाम है। कभी सेना के समर्थन से सत्ता में आए इमरान खान का सेना के साथ संबंध 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद बिगड़ते चले गए।
इमरान खान ने लगातार असीम मुनीर और प्रतिष्ठान पर उन्हें ‘गैरकानूनी’ तरीके से जेल भेजने का आरोप लगाया है। वहीं, सेना 9 मई 2023 के विरोध प्रदर्शनों के लिए पीटीआई को जिम्मेदार ठहराती है, जब सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए थे।
यह टकराव पाकिस्तान की राजनीति को दशकों से परिभाषित करता रहा है – निर्वाचित नागरिक नेतृत्व और शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान के बीच सत्ता की रस्साकशी। इमरान खान की मौत की अफवाहें इसी पृष्ठभूमि में एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ पहुंची हैं।
मायने और प्रभाव: पाकिस्तान की स्थिरता पर खतरा?
इमरान खान की मौत की अनिश्चित अफवाहें, उन्हें मिलने से रोकने के प्रयास और पीटीआई की बड़े पैमाने पर लामबंदी की धमकी, पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरे पैदा करती हैं। यह सिर्फ एक नेता के स्वास्थ्य का मामला नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य और नागरिक-सैन्य संबंधों का एक बड़ा सवाल है।
अगर इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जाती और उनकी पार्टी को उनसे मिलने नहीं दिया जाता, तो जनता का गुस्सा बेकाबू हो सकता है। 20 लाख लोगों की सड़कों पर उतरने की चेतावनी कोई छोटी बात नहीं है और इससे देश में बड़े पैमाने पर हिंसा और अराजकता फैल सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा रही हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है। इमरान खान का भविष्य ही पाकिस्तान की आने वाली सियासत की दिशा तय करेगा।



