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ईरान समझौते पर ट्रंप का यू-टर्न: ‘सहमत’ तो हुए, पर धमकी दी ‘बम गिराने’ की!

“अगर वे ठीक से बर्ताव नहीं करते, तो हम सीधे उनके सिर के ठीक ऊपर फिर से बम गिराने लगेंगे।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ये शब्द किसी युद्धग्रस्त क्षेत्र से नहीं, बल्कि जी-7 शिखर सम्मेलन के शांत माहौल से उभरे हैं, और इन्होंने दुनिया को सकते में डाल दिया है। जिस ईरान समझौते पर हाल ही में ‘सहमति’ बनी थी, अब ट्रंप उसे ‘अंतिम’ मानने को तैयार नहीं।

ट्रंप का यह बयान तब आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस ‘समझौता ज्ञापन’ पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। उनके इस रुख ने मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों पर फिर से सवालिया निशान लगा दिया है।

ट्रंप का ‘बम गिराने’ वाला बयान

जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सीसी के साथ खड़े होकर ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि ईरान के साथ जिस डील पर सहमति बनी है, वह अभी ‘अंतिम नहीं’ है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनका व्यवहार ठीक नहीं रहा, तो अमेरिका फिर से उन पर ‘बम गिराने’ लगेगा।

ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के लिए एक निवेश फंड को मंजूरी देने को तैयार था। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान में कोई निवेश नहीं कर रहा है।

मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस समझौते के तहत ‘ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।’ यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया परमाणु अप्रसार को लेकर चिंतित है।

क्या था यह ईरान समझौता?

अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता में रविवार को हुआ था। इसे ‘समझौता ज्ञापन’ (Memorandum of Understanding) का नाम दिया गया है, लेकिन इसके विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

पहले सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि ‘समझौते पर पूरी तरह हस्ताक्षर हो चुके हैं’ और इसका पूरा पाठ ‘बहुत जल्द’ प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि, उनके ताजा बयान से स्थिति पूरी तरह बदल गई है।

इस समझौते के तहत, हॉरमुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के फिर से खोलने और ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गई थी। यह संघर्ष विराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाता, जिसमें दोनों पक्ष अंतिम समझौते पर बातचीत करते।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी वार्ता भी इसी सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है। लेकिन बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय संपादक जेरेमी बोवेन के अनुसार, यह कोई शांति समझौता नहीं है, बल्कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत जैसे जटिल मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए टाल देता है।

G-7 देशों की क्या थी राय?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से पहले, जी-7 देशों (अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान) ने एक संयुक्त बयान जारी कर मध्य पूर्व में हुई ‘महत्वपूर्ण प्रगति’ का स्वागत किया था। उन्होंने एक ‘मजबूत और व्यापक कूटनीतिक समझौते’ का दृढ़ समर्थन किया था, जो पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा ला सके।

जी-7 देशों ने कहा था कि वे समझौते को लागू करने में ‘समर्थन देने और योगदान करने के लिए तैयार’ हैं, लेकिन अब ट्रंप के बयान ने इस सामूहिक सहमति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मायने और प्रभाव: क्यों ज़रूरी है यह ख़बर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान समझौते पर यह यू-टर्न वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए गहरे मायने रखता है। आम जनता के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अनिश्चितता को बढ़ाती है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय संघर्षों पर पड़ सकता है।

अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो यह पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है, जिससे मानवीय संकट और शरणार्थी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो ऊर्जा के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर हैं, यह बयान भू-राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबाव का संकेत देता है।

यह घटना दिखाती है कि कैसे बड़े देशों के नेताओं के बयान अंतरराष्ट्रीय समझौतों की विश्वसनीयता को पल भर में बदल सकते हैं। जिस समझौते पर सहमति बनने की बात कही जा रही थी, उसका भविष्य अब एक बार फिर अधर में लटक गया है। यह वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए लगातार बातचीत और कूटनीति के महत्व को रेखांकित करता है।

Image Source: www.bbc.com

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