राजकोट की शांत सुबह में एक बुजुर्ग दंपति के लिए सन्नाटा उस वक्त चीख में बदल गया, जब उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक खौफनाक जाल में फंसाया गया। साइबर ठगों ने खुद को TRAI और ED अधिकारी बताकर न सिर्फ उन्हें डराया-धमकाया, बल्कि ₹25 लाख की मोटी रकम ऐंठने की भी कोशिश की। यह घटना साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती को उजागर करती है, जहां अपराधी नए-नए तरीकों से आम लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।
राजकोट पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस बड़े आर्थिक धोखाधड़ी को टाल दिया और बुजुर्ग दंपति को चार घंटे के मानसिक उत्पीड़न से बचाया। यह मामला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे डिजिटल दुनिया में थोड़ी सी चूक हमें बड़े खतरे में डाल सकती है।
रात के अंधेरे में ठगों का वार: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ
यह चौंकाने वाली घटना राजकोट के कालवाड़ रोड इलाके में रहने वाले एक 75 वर्षीय बुजुर्ग दंपति के साथ हुई। रात के करीब 2:40 बजे एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की अधिकारी ‘प्रीति वर्मा’ बताया। कुछ देर बात करने के बाद उसने कॉल एक पुरुष को दे दिया, जिसने खुद को अपना वरिष्ठ अधिकारी बताया।
इसके बाद उस व्यक्ति ने दूसरे नंबर से वीडियो कॉल किया। उसका चेहरा तो दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन उसने बुजुर्ग दंपति को अगल-बगल कुर्सियों पर बैठने का निर्देश दिया। उसने उनके आधार कार्ड की जांच की और दावा किया कि उनके आधार विवरण का उपयोग करके एक बैंक खाता खोला गया था, जिससे ₹2 करोड़ का बड़ा घोटाला हुआ है।
धमकी और दबाव: ₹25 लाख की मांग
ठगों ने दंपति को बताया कि उनके खाते में ₹2 करोड़ के धोखाधड़ी से ₹25 लाख ट्रांसफर हुए हैं। उन्होंने इसे एक गंभीर मामला बताते हुए धमकी दी कि उन्हें 3 से 9 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा और ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर पूछताछ के लिए मुंबई ले जाया जाएगा। यहां तक कि उन्हें यह भी डराया गया कि जेल में उन्हें सोफा, बिस्तर या पंखे जैसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी।
ठगों ने दंपति को अपने घर के दरवाजे बंद रखने, फोन को चार्जर से जोड़े रखने और बिना किसी रुकावट के वीडियो कॉल जारी रखने का निर्देश दिया। उन्हें किसी भी घरेलू सहायक या बाहर के व्यक्ति को घर में प्रवेश न देने और किसी से भी संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी गई। धीरे-धीरे, ठगों ने ₹25 लाख की मांग शुरू कर दी, यह दावा करते हुए कि यह रकम उनके खाते में जमा हुई है और उन्हें चुकानी पड़ेगी।
बुजुर्ग दंपति की हिम्मत और राजकोट पुलिस की फुर्ती
करीब चार घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के इस मानसिक दबाव में रहने के बाद, बुजुर्ग व्यक्ति ने हिम्मत जुटाई। उन्होंने किसी तरह 112 पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। राजकोट पुलिस कंट्रोल रूम ने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को अलर्ट किया।
PI एम.डी. गढ़वी और उनकी टीम बिना देर किए दंपति के घर पहुंची। पुलिस ने उन्हें समझाया कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज नहीं होती और वे साइबर ठगों के जाल में फंस गए हैं। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से दंपति को ₹25 लाख की बड़ी धोखाधड़ी से बचा लिया गया। पुलिस ने दंपति को आश्वस्त किया और कानूनी स्थिति समझाई, जिसके बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
मायने और प्रभाव: साइबर अपराध से कैसे बचें?
राजकोट में हुई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ जैसे साइबर अपराध तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अक्सर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं, जो डिजिटल दुनिया से कम परिचित होते हैं। यह दिखाता है कि ठग कितने शातिर हो गए हैं, जो सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों में डर पैदा करते हैं।
इस घटना से हमें कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं:
- सरकारी अधिकारी कभी नहीं मांगते पैसे: TRAI, ED या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे की मांग नहीं करती, न ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत सतर्क हो जाएं।
- अज्ञात नंबरों से बचें: अनजान नंबरों से आने वाले कॉल या वीडियो कॉल का जवाब देने से बचें। अगर कॉल उठा भी लें, तो अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
- घबराएं नहीं, पुलिस को बताएं: अगर आप ऐसे किसी जाल में फंस जाते हैं, तो घबराएं नहीं। तुरंत 112 या स्थानीय पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित करें। राजकोट पुलिस की तरह, वे आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं।
- जागरूकता ही बचाव है: अपने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को ऐसे स्कैम के बारे में जागरूक करें। उन्हें बताएं कि इंटरनेट और फोन का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
राजकोट पुलिस की मुस्तैदी ने इस बार एक बड़े नुकसान को टाल दिया, लेकिन साइबर सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!
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