मध्य-पूर्व में तनाव फिर अपने चरम पर है। अमेरिका और ईरान के बीच होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी खींचतान ने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिख रहा है, जिसमें डाउ जोन्स इंडेक्स भी अछूता नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना होरमुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने वाले किसी भी ईरानी जहाज या उसके ग्राहकों को रोकेगी। उन्होंने यह भी मांग की है कि जलडमरूमध्य में यातायात की सुरक्षा के लिए अमेरिका को 20% शुल्क के बराबर मुआवजा दिया जाए। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पिछले सप्ताहांत से हमलों का आदान-प्रदान जारी है।
होरमुज जलडमरूमध्य: तनाव का नया केंद्र
यह जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति का मार्ग है। अमेरिका और ईरान दोनों इस पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि यह “ईरानी नाकाबंदी” केवल ईरान के जहाजों या ग्राहकों को रोकेगी, जबकि अन्य सभी देशों के लिए रास्ता खुला रहेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
इस घोषणा के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड वायदा 9.6% बढ़कर $83.30 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो मई 2020 के बाद इसका सबसे अच्छा दैनिक प्रदर्शन है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट वायदा भी 9.4% बढ़कर $78.14 पर पहुंच गया।
शेयर बाजारों पर असर: डाउ जोन्स इंडेक्स में गिरावट
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती तेल कीमतों का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा है। निवेशकों में घबराहट का माहौल है, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। खासकर अमेरिकी शेयर बाजार में, जहां डाउ जोन्स इंडेक्स समेत अन्य सूचकांकों में तेज गिरावट आई। चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों, खासकर एसके हाइनिक्स, को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।
हमलों का सिलसिला और जवाबी कार्रवाई
पिछले सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच कई हमले हुए हैं। अमेरिकी सेना ने शनिवार को 140 लक्ष्यों पर हमला किया, जिसके बाद रविवार को ईरान पर एक और हमले की लहर शुरू की। ये हमले होरमुज से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा किए गए हमले के जवाब में थे।
ईरान की प्रतिक्रिया और दावों का खंडन
ईरान ने रविवार को जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और ओमान में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर जवाबी हमले किए। ईरानी राज्य मीडिया ने दावा किया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होरमुज जलडमरूमध्य को अगले आदेश तक बंद कर दिया है, लेकिन अमेरिकी सेना ने इस दावे का खंडन किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए खुला है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, जिसका सीधा बोझ आम उपभोक्ता पर पड़ेगा। माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।
शेयर बाजारों में गिरावट निवेशकों की पूंजी को प्रभावित करती है, जिससे आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बनता है। व्यापार मार्गों में व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर सकता है, जिससे वस्तुओं की कमी और कीमतों में वृद्धि हो सकती है। यह स्थिति न केवल बड़े व्यवसायों बल्कि छोटे उद्योगों और रोजमर्रा के जीवन को भी प्रभावित कर सकती है। इस भू-राजनीतिक खींचतान का शांतिपूर्ण समाधान निकालना बेहद ज़रूरी है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक झटकों से बचाया जा सके।



