15 साल बाद गिरफ्त में एक करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल: बंगाल में माओवादी आतंक के किले पर बड़ा प्रहार
15 साल का इंतजार, करोड़ों का इनाम और जंगल से लेकर रिश्तेदारों के घरों तक की लुका-छिपी… अंततः पश्चिम बंगाल पुलिस के बिछाए जाल में फंस ही गया देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में से एक असीम मंडल उर्फ आकाश। उसकी गिरफ्तारी को बंगाल और झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
यह गिरफ्तारी न केवल सुरक्षा बलों की दृढ़ता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं। असीम मंडल पर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था और वह माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का महत्वपूर्ण सदस्य था।
कौन है असीम मंडल उर्फ आकाश?
असीम मंडल, जिसे ‘आकाश’ के नाम से भी जाना जाता है, माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति का एक प्रमुख सदस्य था। वह लंबे समय से पश्चिम बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था, जहां उसने अपनी ‘बंग टोली’ (बंगाल इकाई) के जरिए आतंक फैला रखा था।
वह कई हिंसक वारदातों और हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ हत्या, अपहरण और जबरन वसूली जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी से इस क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को भारी क्षति पहुंचने की उम्मीद है।
15 साल की लुका-छिपी का अंत
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, असीम मंडल पिछले 15 सालों से लगातार अपनी पहचान और ठिकाना बदल रहा था। उसने जंगलों में अपने हथियार छोड़े और आम ग्रामीण बनकर ललाट गांव जैसे इलाकों में छिपकर रह रहा था। वह अपने रिश्तेदारों के घरों में भी पनाह लेता था, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा रह सके।
उसकी आखिरी चाल, जिसमें वह एक साधारण ग्रामीण के वेश में छिपा था, उस पर भारी पड़ गई। पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई ने उसे ललाट गांव से धर दबोचा। झारखंड पुलिस को भी लंबे समय से उसकी तलाश थी।
माओवादी संगठन पर गहरा असर
असीम मंडल की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब माओवादी संगठन अपनी पकड़ कमजोर होने के कारण संघर्ष कर रहा है। हाल ही में उसकी ‘बंग टोली’ को भंग करने की खबरें भी आई थीं, जो संगठन के भीतर आंतरिक कलह और दबाव का संकेत देती हैं।
इस गिरफ्तारी के बाद, राज्य की वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों और पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा बलों की सराहना की है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में ‘रेड टेरर’ को फैलने नहीं देगी और शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद करेगी।
मायने और प्रभाव
असीम मंडल की गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधी को पकड़ना नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। आम जनता के लिए इसका सीधा मतलब है कि अब वे एक प्रमुख नक्सली नेता के खौफ से मुक्त हो सकेंगे, जिसने वर्षों तक उनके जीवन को प्रभावित किया था।
यह गिरफ्तारी उन सभी माओवादियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अभी भी भूमिगत हैं, कि वे कितने भी समय तक छिपे रहें, कानून उन्हें ढूंढ निकालेगा। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में ऐसी कार्रवाइयों को और अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दे पाएंगे। साथ ही, यह उन क्षेत्रों में विकास और सुशासन की राह भी खोलेगा, जहां नक्सली हिंसा के कारण प्रगति बाधित थी।



