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उन्नाव एक्सप्रेसवे पर ‘मौत की झपकी’ का कहर: 7 की मौत, 24 घायल; सुरक्षा और बचाव कार्य पर गंभीर सवाल

उन्नाव एक्सप्रेसवे पर ‘मौत की झपकी’ का कहर: 7 की मौत, 24 घायल; सुरक्षा और बचाव कार्य पर गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक बस चालक की कथित ‘मौत की झपकी’ ने सात जिंदगियों को लील लिया, जबकि 24 अन्य यात्रियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। दिल्ली से गोरखपुर जा रही यह बस 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी, जब अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे का मंजर: कैसे हुआ सब कुछ?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंगलवार देर रात आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर यह भयावह हादसा उस वक्त हुआ, जब बस का चालक गहरी नींद में सो गया। बस तेज रफ्तार में थी और उसने उन्नाव के पास एक अंडरपास के करीब डिवाइडर को टक्कर मार दी।

टकराव इतनी जबरदस्त थी कि बस का दाहिना हिस्सा डिवाइडर पर चढ़कर पुलिया से टकराया और फिर बाईं ओर पलट गई। इस दौरान एक्सप्रेसवे के किनारे लगी लोहे की सेफ्टी ग्रिल भी टूट गई और कई यात्री 30 फीट नीचे खंती में जा गिरे। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई, मंजर देख लोग सिहर उठे।

बचाव कार्य में देरी और अस्पतालों की बदहाली

जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद यूपीडा (UPIDA) और पुलिस कर्मियों को मौके पर पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया, जिससे बचाव कार्य शुरू होने में महत्वपूर्ण देरी हुई। इस दौरान घायल यात्री दर्द से तड़पते रहे।

करीब 20 एंबुलेंसों से घायलों को स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहां भी पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण उन्हें दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। सीएचसी में उस समय केवल एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक वार्ड बॉय मौजूद थे। सीएचसी प्रभारी और अन्य फार्मासिस्ट लगभग एक घंटे बाद अस्पताल पहुंचे, तब तक कई घायल दर्द से जूझते रहे।

‘झपकी’ की चेतावनी और फिर भी लापरवाही

बस में सवार यात्रियों, बृजेश कुमार और विनय यादव ने बताया कि यह बस दिल्ली से गोरखपुर जा रही थी। हादसे से करीब आधे घंटे पहले आगरा थाना के धरमपुर निवासी पहले चालक विनय शर्मा को झपकी आ गई थी, जिससे बस एक कार से टकराते-टकराते बची।

यात्रियों के बीच चीख-पुकार मचने के बाद विनय के साथ मौजूद दूसरे चालक दीपक ने बस की कमान संभाली और विनय सोने चला गया। लेकिन इसके कुछ ही देर बाद यह भीषण दुर्घटना हो गई, जिससे साफ होता है कि चालक की लापरवाही और ओवरस्पीडिंग ने यह त्रासदी बुलाई।

पीड़ितों का दर्द: गहरी चोटें और उजड़ते परिवार

इस हादसे में मारे गए सात लोगों में से कई अपने घर लौट रहे थे, अपनों से मिलने की उम्मीद में। उनके परिवार के सपने एक झटके में उजड़ गए। घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

मृतक विजय कुमार का बायां पैर धड़ से अलग हो गया था। घायलों में अरुण कुमार के दाएं पैर और हाथ में चोटें आईं, सोमअली के दोनों पैरों में चोट थी, और ढाई महीने की गर्भवती हबीबा के बाएं हाथ और छाती के बाएं हिस्से में गंभीर चोटें आईं। गोलू, राहुल, जानकी, फरमान अंसारी, अरविंद मिश्र, गणेश दीक्षित और लराइब आलम सहित कई अन्य यात्रियों को सिर, चेहरे, हाथ, पैर और छाती में गंभीर चोटें आई हैं।

मायने और प्रभाव: सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल

उन्नाव में हुआ यह भीषण बस हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी सड़क सुरक्षा प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की कई कमजोरियों को उजागर करता है। यह घटना हमें कई गंभीर सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। पहला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल ड्राइवरों की फिटनेस, उनके आराम के घंटों और लंबी दूरी की यात्राओं के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों को लेकर है। क्या बस ऑपरेटर ड्राइवरों की पर्याप्त नींद और आराम सुनिश्चित करते हैं? क्या 120 किमी/घंटा की रफ्तार पर बस चलाना और फिर चालक का सो जाना, यह आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में नहीं आता?

दूसरा पहलू एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन सेवाओं की पहुंच और तत्परता का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बचाव दल का मौके पर पहुंचने में आधे घंटे की देरी और फिर स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ की कमी, यह बताता है कि हम ऐसी बड़ी दुर्घटनाओं के लिए कितने तैयार हैं। यात्रियों को समय पर उचित चिकित्सा न मिलना उनके ठीक होने की संभावनाओं को कम करता है और कई बार जानलेवा भी साबित होता है।

इस त्रासदी से सबक लेते हुए, सरकार और संबंधित एजेंसियों को न केवल ड्राइवरों की नियमित जांच, उनके आराम के घंटों को सुनिश्चित करने और ओवरस्पीडिंग पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है, बल्कि उन्नाव जैसे संवेदनशील इलाकों में और अन्य उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और नजदीकी अस्पतालों में आपातकालीन स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। आम जनता के लिए भी यह एक चेतावनी है कि वे लंबी यात्राओं के लिए बस चुनते समय ऑपरेटर की विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों की जांच करें। यह हादसा उन परिवारों के लिए एक कभी न भरने वाला घाव है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, लेकिन यह हम सभी के लिए एक मौका भी है कि हम ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करें।

Image Source: www.amarujala.com

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