कर्नाटक की राजनीति में आरोपों और पलटवार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में, मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने अपनी संपत्ति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी द्वारा लगाए गए आरोपों पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह जुबानी जंग राज्य के राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा कर रही है।
डी. के. शिवकुमार ने दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें ‘निराशा’ में बयान देने वाला बताया। उन्होंने अपनी संपत्ति के स्रोत और उसकी कानूनी वैधता पर खुलकर बात की।
डी. के. शिवकुमार का पलटवार: ‘अपनी संपत्ति पर मैं खुलकर बात करता हूं’
पूर्व मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने डी. के. शिवकुमार की संपत्ति को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने खास तौर पर शोभा डेवलपर्स के साथ एक बड़े निवेश और उसके भारी मुनाफे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि शिवकुमार ने अवैध तरीकों से 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा की है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, डी. के. शिवकुमार ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा, “आज मेरी संपत्ति का मूल्य 1,400 करोड़ रुपये है, लेकिन यह सब मैंने कानूनी दायरे में रहकर कमाया है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”
उन्होंने कुमारस्वामी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे भाजपा और जेडीएस गठबंधन में चल रही आपसी होड़ और अपनी ‘निराशा’ के कारण ऐसे बयान दे रहे हैं। डी. के. शिवकुमार ने सवाल किया कि कुमारस्वामी इतने समय तक चुप क्यों थे, जबकि उनके पिता देवेगौड़ा ने खुद उस योजना पर हस्ताक्षर किए थे, और कुमारस्वामी भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
‘कचरा पीटकर पैसे नहीं कमाए, यह मेरा व्यवसाय है’
शोभा डेवलपर्स से जुड़े आरोपों पर डी. के. शिवकुमार ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “हां, हम कितना भी कर सकते हैं। मुझे पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत बंगारप्पा ने 1 लाख रुपये में एक प्लॉट दिया था, जिसकी कीमत आज 20 करोड़ रुपये है। इसमें क्या गलत है? क्या मैंने रिश्वत ली है? क्या मैं किसी घोटाले में फंसा हूं? कुछ भी नहीं है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके पास ‘कचरा पीटकर कमाए गए पैसे’ नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी व्यवसायिक पृष्ठभूमि है। डी. के. शिवकुमार ने कहा कि वे हर साल अपनी संपत्ति की घोषणा करते हैं और चुनाव आयोग तथा ईडी जैसी सभी एजेंसियां इसे देख चुकी हैं। उन्होंने किसी भी बड़ी एजेंसी से जांच कराने की चुनौती भी दी।
कुमारस्वामी पर ‘निराशा’ और ‘संस्कार’ की कमी का आरोप
डी. के. शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा, “जो अपने पिता और भाई-बंधुओं को पचा नहीं पाए, वे हमें क्या छोड़ेंगे? हमें उनसे किसी भलाई की उम्मीद नहीं है।”
उन्होंने कुमारस्वामी पर ‘संस्कार और संस्कृति’ की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि वे उनकी सरकार की लोकप्रियता को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और ईर्ष्यावश ऐसे आरोप लगा रहे हैं।
विधानसभा के अंदर बहस की चुनौती
विधानसभा की सीढ़ियों पर बहस करने की कुमारस्वामी की चुनौती पर डी. के. शिवकुमार ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “विधानसभा की सीढ़ियों पर क्यों? अगर हिम्मत है, तो किसी को काउंसिल या असेंबली की सदस्यता से इस्तीफा दिलवाकर विधानसभा के अंदर आकर चर्चा करें। विधानसभा की सीढ़ियों पर चर्चा करने के बजाय फ्रीडम पार्क है, वहां जाकर चर्चा कर लें।”
शिक्षा नीति और लंबित बिलों पर भी बात
अपनी दिल्ली यात्रा का विवरण देते हुए डी. के. शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों की शिक्षा नीति और परीक्षा घोटालों को रोकने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य राज्यों के मंत्री व मुख्यमंत्री मौजूद थे।
उन्होंने ठेकेदारों के 38,000 करोड़ रुपये के लंबित बिलों पर भी बात की, जो पिछली सरकार के कार्यकाल के थे। डी. के. शिवकुमार ने कहा कि स्थिति मुश्किल है, लेकिन इसके समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
मायने और प्रभाव
डी. के. शिवकुमार और एच. डी. कुमारस्वामी के बीच यह ताजा जुबानी जंग कर्नाटक की राजनीति में बढ़ती कटुता को दर्शाती है। यह सिर्फ दो नेताओं के बीच का व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।
मुख्यमंत्री पद पर बैठे डी. के. शिवकुमार का अपनी संपत्ति को लेकर इतना आक्रामक बचाव करना यह दिखाता है कि वे इन आरोपों को हल्के में नहीं ले रहे हैं। उनकी प्रतिक्रिया से साफ है कि वे विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर हावी होने का मौका नहीं देना चाहते और अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क हैं।
वहीं, कुमारस्वामी के आरोपों के पीछे भाजपा और जेडीएस के बीच बढ़ती नजदीकी और आगामी चुनावों की रणनीति भी हो सकती है। इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से जनता के बीच नेताओं की छवि पर असर पड़ सकता है और यह आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कर्नाटक में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है और आगामी दिनों में ऐसे और भी तीखे वार-पलटवार देखने को मिल सकते हैं, जो राज्य के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत हमलों पर केंद्रित हो सकते हैं।



