फिरोजाबाद: डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से हत्या करने वाले दरिंदे विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को आखिरकार उसके अंजाम तक पहुंचने का दिन आ गया है। फिरोजाबाद की एक अदालत ने इस रूह कंपा देने वाले हत्याकांड में विराज को दोषी करार दिया है। आज, शुक्रवार को उसे सजा सुनाई जाएगी, जिसके बाद समाज में एक मासूम की बर्बर हत्या करने वाले को उसके किए की सज़ा मिलेगी।
यह मामला जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, अब न्याय की दहलीज पर खड़ा है। सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई वो खौफनाक वारदात, जब एक छोटे बच्चे को महज 27 सेकंड में आठ बार जमीन पर पटका गया था, हर किसी के ज़हन में ताज़ा है।
फिरोजाबाद: 27 सेकंड में मासूम आरव को 8 बार पटकने वाला दोषी
मामला फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित यादव कॉलोनी का है, जहां 30 मई को दिनदहाड़े यह अमानवीय घटना हुई थी। आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने अपनी रिश्ते की भाभी रति से शादी करने की जिद पूरी न होने पर उनके डेढ़ साल के मासूम बेटे आरव को अपनी क्रूरता का शिकार बनाया।
जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने बृहस्पतिवार को विराज को दोषी मानते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज अदालत इस जघन्य अपराध के दोषी को सजा सुनाएगी। पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी को जेल से अदालत लेकर पहुंची थी, जहां उसके चेहरे पर सजा का खौफ साफ झलक रहा था।
क्या था पूरा मामला और कैसे हुई थी वारदात?
दरअसल, आरव की मां रति देवी की शादी फरवरी 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। पति से अनबन के चलते रति पिछले पांच महीने से अपने मायके में रह रही थीं। इसी दौरान सुमित के फुफेरे भाई विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने रति को भरोसे में लेकर उससे शादी का प्रस्ताव रखा। रति ने जब यह प्रस्ताव ठुकरा दिया, तो विराज ने बदला लेने की ठान ली।
30 मई को रति अपनी मां पिंकी देवी के साथ कानूनी सलाह लेने शिकोहाबाद आई थीं। आरोपी विराज भी वहीं पहुंच गया। उसने आरव को टॉफी दिलाने के बहाने बाहर ले जाकर घर से महज 50 मीटर दूर एक सुनसान सड़क पर इस वारदात को अंजाम दिया। उसने आरव को महज 27 सेकंड के भीतर आठ बार जमीन पर पटका, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद वह बच्चे के शव को दरवाजे पर फेंककर फरार हो गया था।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अदालत का फैसला
फिरोजाबाद पुलिस ने इस हृदय विदारक घटना के बाद त्वरित कार्रवाई की। मुठभेड़ के बाद देर रात आरोपी विराज को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने के लिए पुलिस ने शुरू से ही कमर कस ली थी।
इंस्पेक्टर अनुज कुमार की विवेचना में वारदात के महज छह दिन के भीतर यानी 5 जून को ही अकाट्य साक्ष्यों के साथ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जिला जज की अदालत में रिकॉर्ड समय में 15 जून से गवाहियां शुरू हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को पूर्ण मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।
मायने और प्रभाव: समाज पर गहरा असर
फिरोजाबाद के आरव हत्याकांड में अदालत का यह फैसला सिर्फ एक परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को एक बड़ा संदेश देता है। यह दिखाता है कि कानून का हाथ लंबा है और जघन्य अपराध करने वाले को देर-सवेर अपने किए की सजा जरूर मिलती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बच्चों के खिलाफ अपराधों पर समाज में चिंता बढ़ रही है।
इस मामले की त्वरित जांच और सुनवाई ने न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को मजबूत किया है। यह पुलिस की तत्परता और न्यायपालिका की दक्षता का भी प्रमाण है। यह घटना हमें रिश्तों की जटिलताओं और एकतरफा प्रेम के भयावह परिणामों पर सोचने पर मजबूर करती है। सबसे महत्वपूर्ण, यह फैसला मासूमों की सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है। उम्मीद है कि यह सजा भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में एक मिसाल कायम करेगी।
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