मेरठ में सीएम योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर बड़ा हमला: ‘बाबर के अनुयायी’ बनाम ‘बजरंगी भक्त’
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बयान अक्सर हलचल मचा देता है, और इस बार मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय से उन्होंने जो संदेश दिया है, वह सीधा विपक्ष पर वार है। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि ‘बाबर के अनुयायियों’ को ‘बजरंगी के भक्त’ जवाब देंगे, क्योंकि ‘इन्हें राम से बैर है’। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी गहमागहमी तेज हो रही है, और इसने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
सुभारती यूनिवर्सिटी में शक्ति केंद्र सम्मेलन
मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को मेरठ के सुभारती यूनिवर्सिटी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ-साथ विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद थे, जिन्होंने संगठन की मजबूती पर जोर दिया और आगामी चुनौतियों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार रहने का आह्वान किया।
‘राम से बैर’ और ‘बाबर के अनुयायी’ पर सीएम योगी का वार
अपने संबोधन के दौरान, सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो लोग राम और राष्ट्र की संस्कृति का विरोध करते हैं, वे ‘बाबर के अनुयायी’ हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को ‘बजरंगी के भक्त’ यानी हनुमान जी के अनुयायी करारा जवाब देंगे। यह बयान भाजपा की हिंदुत्ववादी विचारधारा और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी भावनाओं को एक बार फिर उभारने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जहां राजनीतिक ध्रुवीकरण की अपनी अहमियत है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि कुछ राजनीतिक दल राम के नाम से भी बैर रखते हैं और देश की सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसे तत्वों से सावधान रहें और एकजुट होकर सनातन धर्म के मूल्यों की रक्षा करें। यह बयान आगामी चुनावों के लिए भाजपा के आक्रामक रुख का भी संकेत देता है।
मायने और प्रभाव: यूपी की राजनीति पर असर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसके गहरे मायने और दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में:
- सियासी ध्रुवीकरण: ‘बाबर के अनुयायी’ और ‘बजरंगी के भक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सीधे तौर पर धार्मिक पहचान पर आधारित ध्रुवीकरण की रणनीति का हिस्सा है। भाजपा अक्सर अपने समर्थकों को एकजुट करने और विरोधी दलों को एक खास वर्ग के पक्षधर के रूप में दिखाने के लिए ऐसे बयानों का सहारा लेती है। यह बयान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जहां जाट, गुर्जर और मुस्लिम समुदायों का प्रभाव है, राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
- चुनावी एजेंडा तय करना: आगामी चुनावों को देखते हुए, यह बयान भाजपा के चुनावी एजेंडे को स्पष्ट करता है। राम मंदिर निर्माण के बाद भी, पार्टी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों को प्रमुखता से उठाए रखना चाहती है। यह विपक्ष को विकास, महंगाई या बेरोजगारी जैसे मुद्दों से हटाकर धार्मिक और सांस्कृतिक बहसों में उलझाने का प्रयास भी हो सकता है, जिससे भाजपा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत कर सके।
- कार्यकर्ताओं में जोश का संचार: शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन में दिया गया यह बयान कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और उन्हें आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार करने का एक प्रभावी तरीका है। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वे किस वैचारिक मोर्चे पर लड़ रहे हैं और उन्हें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना है।
- आम जनता पर असर: मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आम जनता के लिए इस बयान के अलग-अलग मायने हो सकते हैं। एक वर्ग इसे अपनी आस्था और संस्कृति के सम्मान से जोड़कर देखेगा और भाजपा के पक्ष में खड़ा हो सकता है, जबकि दूसरा वर्ग इसे समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश के रूप में देख सकता है। यह बयान स्थानीय स्तर पर सामाजिक सद्भाव और राजनीतिक संवाद को प्रभावित कर सकता है।
कुल मिलाकर, सीएम योगी का मेरठ से दिया गया यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में गरमाहट बनाए रखेगा और विपक्ष को इस पर अपनी रणनीति बनाने के लिए मजबूर करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस ‘राम से बैर’ और ‘बाबर के अनुयायी’ वाले हमले का जवाब कैसे देता है और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।



