भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन कुछ खिलाड़ियों का सफर फैंस को हैरत में डाल देता है। हाल ही में टी20 विश्व कप 2026 में भारत को जीत दिलाने वाले हीरो संजू सैमसन के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। जिस खिलाड़ी को देश ने सर-आँखों पर बिठाया, अब उसे ही टीम से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।
विश्व कप का चमकता सितारा
याद कीजिए, इस साल की शुरुआत में जब भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप जीता था, तो उस जीत के पीछे संजू सैमसन का नाम सबसे आगे था। टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी, लेकिन जब मौका मिला, तो उन्होंने कमाल कर दिया। वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो के मैच में 97 रनों की नाबाद पारी खेलकर भारत को सेमीफाइनल में पहुँचाया।
इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 और फाइनल में न्यूजीलैंड के सामने फिर 89 रनों की तूफानी पारियों से उन्होंने टीम इंडिया को विश्व कप का ताज पहनाया। उस वक्त फैंस ने उन्हें खूब सराहा था और टीम मैनेजमेंट पर सवाल उठाए थे कि ऐसे खिलाड़ी को पहले क्यों नहीं खिलाया गया।
फिर वही पुरानी कहानी?
लेकिन विश्व कप के बाद अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। टीम इंडिया के यूके दौरे पर आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैचों और इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 में संजू सैमसन का बल्ला खामोश रहा। उनके स्कोर रहे 5, 0 और 1। यह संजू की पुरानी कमजोरी रही है कि शानदार प्रदर्शन के बाद वह अचानक लय खो बैठते हैं।
नए हीरो का उदय और संजू पर गाज
भारतीय क्रिकेट में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि एक नया सितारा आते ही पुराने चेहरों को भुला दिया जाता है। इस बार आईपीएल में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले 15 साल के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने सबका ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर उन्हें टीम में शामिल करने की जोरदार मांग उठी।
टीम मैनेजमेंट ने भी इस दबाव को महसूस किया और आयरलैंड तथा इंग्लैंड के खिलाफ मैचों में वैभव को मौका देने के लिए संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया। अभिषेक शर्मा अपनी अच्छी फॉर्म के चलते बच गए, लेकिन संजू पर गाज गिर गई।
जिम्बाब्वे दौरे से भी बाहर: क्या यह आराम है या सजा?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संजू सैमसन को इस महीने के आखिर में होने वाले जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ आराम है या विश्व कप हीरो को दी गई सजा? अटकलें यह भी हैं कि इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में बाहर किए जाने पर संजू की कोच गौतम गंभीर से मैदान पर बहस हुई थी, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
मायने और प्रभाव
संजू सैमसन के साथ हो रहा यह घटनाक्रम भारतीय क्रिकेट की चयन नीति पर कई बड़े सवाल खड़े करता है। एक खिलाड़ी, जिसने कुछ ही समय पहले देश को विश्व कप जिताया, उसे महज तीन असफल पारियों के बाद टीम से बाहर कर देना, क्या यह न्यायसंगत है? यह किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
यह दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है और युवा प्रतिभाओं को लगातार मौके दिए जा रहे हैं। हालांकि, अनुभवी और प्रदर्शन कर चुके खिलाड़ियों को भी थोड़ा और समर्थन मिलना चाहिए ताकि वे अपनी लय वापस पा सकें। फैंस की उम्मीदें भी लगातार बदलती रहती हैं; एक मैच में हीरो, अगले में जीरो। टीम मैनेजमेंट को इस संतुलन को बनाए रखना होगा कि कैसे नए टैलेंट को मौका दें और स्थापित खिलाड़ियों का मनोबल भी न टूटने दें। संजू सैमसन का यह प्रकरण युवा खिलाड़ियों के लिए एक सबक भी है कि भारतीय टीम में जगह बनाए रखना कितना मुश्किल है और निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।
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