भारत की न्यायपालिका के सर्वोच्च शिखर, सुप्रीम कोर्ट में अब जजों की संख्या बढ़ने वाली है। यह एक ऐसा फैसला है जो देश में न्याय की गति और गुणवत्ता दोनों पर गहरा असर डालेगा। संसद के मॉनसून सत्र 2026 के ग्यारहवें दिन लोकसभा ने ‘सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, इस अहम विधेयक पर लोकसभा में चर्चा और पास होने के दौरान राज्यसभा में विपक्ष का जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के विरोध के चलते संसद की कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में ऐतिहासिक बिल पास
भारत की न्याय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को बढ़ाना है, ताकि देश के सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के बोझ को कम किया जा सके और न्याय वितरण प्रणाली को और अधिक कुशल बनाया जा सके।
राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा
जहां लोकसभा ने इस बिल को हरी झंडी दे दी, वहीं राज्यसभा में स्थिति अलग थी। सत्र के ग्यारहवें दिन भी विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिससे सदन में लगातार हंगामा होता रहा। इस हंगामे के चलते महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर असर पड़ा और राज्यसभा को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा में यह बिल किस तरह से आगे बढ़ता है।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे ‘मी लॉर्ड’: 8 से 38 तक का सफर
यह जानना दिलचस्प है कि जब 1950 में भारत का सुप्रीम कोर्ट अस्तित्व में आया था, तब इसमें मुख्य न्यायाधीश सहित केवल 8 न्यायाधीश थे। समय के साथ, मामलों के बढ़ते बोझ और देश की बढ़ती आबादी को देखते हुए, न्यायाधीशों की संख्या में कई बार वृद्धि की गई है। अब इस संशोधन विधेयक के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या को 38 तक पहुंचाने का प्रस्ताव है। यह कदम न्यायपालिका को और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
इस सत्र में सुप्रीम कोर्ट से जुड़े बिल के अलावा दो अन्य विधेयक भी पेश किए गए, जिनकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में वृद्धि का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा में रहा।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी?
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ना सीधे तौर पर आम जनता के लिए फायदेमंद है। देश की सबसे बड़ी अदालत में लाखों मामले लंबित हैं, जिनकी सुनवाई में कई साल लग जाते हैं। न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से उम्मीद है कि मामलों का निपटारा तेजी से होगा, जिससे लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
तेज न्याय का मतलब है कि लोगों को अपने कानूनी विवादों के समाधान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह न केवल लोगों के विश्वास को न्यायपालिका में मजबूत करेगा, बल्कि देश में कानून के शासन को भी और प्रभावी बनाएगा। हालांकि, सिर्फ संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं, इसके साथ ही पर्याप्त बुनियादी ढांचा और योग्य न्यायाधीशों की नियुक्ति सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यह बिल भारत की न्याय प्रणाली को आधुनिक और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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