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आंखों से नही जज्बें से सुनील ने किया नेट क्वालीफाई, नेत्रज्योति गई लेकिन जज्बा नही

रिर्पोट/यश द्विवेदी

UP के फतेहपुर जिले से एक ऐसा समाचार सामने आया जिसे सुन कर आप के होसले जाग जाएंगे. जहां एक परिवार के चार लोगों की मृत्यु और दुर्घटना में अपनी दोनों आंखों की ज्योति खोने के बाद भी, एक युवक ने अपने हौसले से NET क्वालीफाई कर. असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की योग्यता प्राप्त की है.

फतेहपुर जनपद के जेल चौकी क्षेत्र के काशीराम कालोनी के रहने वाले, कृष्ण कुमार सोनी के 35 वर्षीय पुत्र सुनील की एक दुर्घटना में वह अपने दोनों आंखों की ज्योति गंवा चुके हैं. इनका पूरा परिवार जिनमे इनके पिता कृष्ण कुमार, मां राम लक्ष्मी, बड़े भाई अनिल कुमार, भाभी सुधा सोनी, पत्नी सरस्वती सोनी और दो बहन रूपरानी और राजरानी के साथ गढरियान पुरवा मोहल्ला में रहता था. किन्तु दुर्भाग्यवश उनके बड़े भाई अनिल कुमार की बीमारी के कारण 2018 में मौत हो गई. इसके बाद 13 अक्टूबर 2022 को पिता कृष्ण कुमार के निधन के 8 दिन बाद भाभी सुधा ने भी दुनिया छोड़ दी. सुनील की शादी 2012 में हुई बाद में इनकी पत्नी सरस्वती सोनी का ब्लड कैंसर से 31 मार्च 2021 निधन हो गया.

भूख से तड़पते थे सुनील
सुनील ने बताया कि कोरोना काल में लॉक डाउन के दौरान हम मां-बेटे भूख से तड़प रहे थे, तभी एक एनजीओ संचालक हिमांशु जी ने हमें राशन उपलब्ध कराया. इस दौरान उन्होंने मुझसे बात की, मेरी पढ़ाई के बारे में पूछा. मेरी अंग्रेजी में बातचीत देखकर उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया. उन्होंने आंखों से दिव्यांग लोगों के लिए पढ़ने के लिए क्या सुविधा होती है, कैसे पढ़ सकते है, इसकी जानकारी दी. इसके बाद ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई कराई. मेरी यूजीसी नेट के एग्जाम की तैयारी करने में मदद की. इसके बाद दो बार यूजीसी नेट की परीक्षा में सहायक के रूप में अपने भाई और एक व्यक्ति को भेजा, लेकिन सफलता नहीं मिली. वहीं तीसरी बार कानपुर में 11 दिसंबर 2023 को हुई यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन नेट की परीक्षा में मैं पास हो गया. अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की योग्यता का सर्टिफिकेट मिल गया है.

 

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