गोरखपुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संध्या सिंह का नाम आज पूरे प्रदेश में गूंज रहा है। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे पूछा, ‘मैं आपके गांव गया हूं…’, तो संध्या ने बड़े सम्मान से जवाब दिया, ‘नहीं सर, आप मेरे घर गए हैं!’ यह संवाद सिर्फ एक बातचीत नहीं, बल्कि उस असाधारण समर्पण की कहानी है, जिसने एक आम कार्यकर्ता को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है।
उत्तरी भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के खजनी विकासखंड के बसियाखोर गांव की रहने वाली संध्या सिंह ने अपने बेहतरीन काम से राज्य का नाम रोशन किया है। हाल ही में वाराणसी में आयोजित नौवें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी की मौजूदगी में उनके कार्यों का एक वीडियो दिखाया गया, जिसने सबका ध्यान खींचा।
संध्या की कहानी सिर्फ काम की नहीं, बल्कि संघर्ष और दृढ़ निश्चय की भी है। अपने पति को आकस्मिक रूप से खोने के बाद, उन्होंने तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभाली और साथ ही अपने आंगनबाड़ी के काम में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने ‘टेक होम राशन’ (THR) के वितरण में आधुनिक तकनीक का शानदार इस्तेमाल किया। गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों की देखभाल में भी उन्होंने एक मिसाल पेश की है। उनके इसी लगन और मेहनत को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद सराहा और उनसे बातचीत की।
गोरखपुर की संध्या सिंह: संघर्ष से सफलता तक
बसियाखोर गांव की संध्या सिंह के लिए जीवन आसान नहीं रहा। पति के असमय निधन ने उन्हें और उनके तीन बच्चों को गहरे सदमे में डाल दिया। लेकिन संध्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने निजी दुख को अपनी ताकत बनाया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को और भी अधिक समर्पण से निभाया। उनका लक्ष्य था अपने गांव की हर गर्भवती महिला और हर बच्चे को सही पोषण और देखभाल मिले।
तकनीक का बेजोड़ इस्तेमाल और समर्पण
संध्या सिंह ने अपने काम में तकनीक को बखूबी अपनाया। ‘टेक होम राशन’ (THR) के वितरण को उन्होंने पूरी तरह से पारदर्शी और प्रभावी बनाया। स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सही समय पर सही लाभार्थी तक पोषण सामग्री पहुंचे। उनके इस नवाचार ने न केवल काम को आसान बनाया, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म कर दी।
गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, उनके पोषण की निगरानी और बच्चों के टीकाकरण में भी संध्या ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनके प्रयासों से उनके क्षेत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है और पोषण के स्तर में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी भी हुए मुरीद
वाराणसी में राष्ट्रीय पोषण माह के मंच पर, जब संध्या सिंह के काम का वीडियो दिखाया गया, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं उनके समर्पण से प्रभावित हुए। मुख्यमंत्री ने संध्या से व्यक्तिगत रूप से बात की और उनके प्रयासों की सराहना की। यह राज्य सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले सम्मान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री का यह संवाद कई अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।
मायने और प्रभाव: क्यों महत्वपूर्ण है संध्या की कहानी?
संध्या सिंह की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और खासकर ग्रामीण उत्तर प्रदेश के लिए कई गहरे मायने रखती है।
- प्रेरणा का स्रोत: संध्या का संघर्ष और सफलता लाखों अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है। यह दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, समर्पण और नवाचार से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
- जमीनी स्तर पर बदलाव: उनकी कहानी यह उजागर करती है कि कैसे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता, जैसे आंगनबाड़ी सेविकाएं, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं। यह सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
- महिला सशक्तिकरण का प्रतीक: पति के निधन के बाद भी हार न मानना और अपने बच्चों के साथ-साथ समाज की जिम्मेदारी उठाना, संध्या को महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत उदाहरण बनाता है।
- तकनीक का सही उपयोग: उन्होंने दिखाया कि कैसे साधारण तकनीक का इस्तेमाल करके भी सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है, खासकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में।
- सरकार की पहचान: मुख्यमंत्री द्वारा सीधे तौर पर उनके काम की सराहना करना यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल बड़े प्रोजेक्ट्स पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर हो रहे अच्छे कामों को भी पहचान और बढ़ावा दे रही है। यह सरकारी तंत्र में जवाबदेही और प्रोत्साहन की भावना को बढ़ाता है।
गोरखपुर की संध्या सिंह जैसी कार्यकर्ताएं ही असल भारत की नींव हैं, जो चुपचाप रहकर भी बड़े बदलाव की इबारत लिखती हैं।
Image Source: hindi.news18.com



