HomeBlogभारत के पड़ोस में तिब्बत फिर हिला: लगातार भूकंपों का सिलसिला, क्या...

भारत के पड़ोस में तिब्बत फिर हिला: लगातार भूकंपों का सिलसिला, क्या है धरती के भीतर की कहानी?

भारत के पड़ोस में, हिमालय की गोद में बसा तिब्बत एक बार फिर भूकंप के झटकों से कांप उठा है। बीते कुछ दिनों से इस संवेदनशील क्षेत्र में लगातार आ रही भूकंप की घटनाएं न सिर्फ स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा रही हैं, बल्कि वैज्ञानिकों और भू-विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर रही हैं। आखिर क्यों बार-बार हिल रही है तिब्बत की धरती?

तिब्बत में सुबह-सुबह आया भूकंप: क्या थी तीव्रता?

शुक्रवार की सुबह 4 बजकर 2 मिनट पर तिब्बत में धरती हिल उठी। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई। इसका केंद्र जमीन से 30 किलोमीटर की गहराई में था, जो आमतौर पर झटकों को सतह पर थोड़ा कम महसूस कराता है, लेकिन लगातार आ रहे भूकंपों के बीच यह घटना महत्वपूर्ण है।

यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे ठीक तीन दिन पहले, 8 सितंबर को भी तिब्बत में 5.3 तीव्रता का एक जोरदार भूकंप आया था, जिसके झटके पड़ोसी देश नेपाल तक में महसूस किए गए थे। इस तरह की लगातार हलचलें क्षेत्र की भूगर्भीय अस्थिरता की ओर इशारा करती हैं।

सिर्फ तिब्बत ही नहीं, पड़ोसी क्षेत्रों में भी हलचल

चौंकाने वाली बात यह है कि इसी शुक्रवार को सिर्फ तिब्बत ही नहीं, बल्कि भारत के पश्चिम बंगाल और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। पश्चिम बंगाल के अलीद्वारपुर में सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर 3.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र 9 किलोमीटर की गहराई में था।

वहीं, अफगानिस्तान में भी 3.5 तीव्रता के भूकंप ने धरती को हिलाया, जिसका केंद्र 163 किलोमीटर की गहराई में था। इन घटनाओं से पता चलता है कि पूरा दक्षिण एशियाई क्षेत्र भूगर्भीय गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है।

धरती क्यों कांपती है? भूकंप आने का वैज्ञानिक कारण

भूकंप आने का मुख्य कारण धरती के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। हमारी पृथ्वी कई बड़ी और छोटी प्लेटों से बनी है जो लगातार खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं या एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तो जमीन के अंदर जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है। इसी ऊर्जा के रिलीज होने से धरती पर झटके महसूस होते हैं, जिन्हें हम भूकंप कहते हैं।

हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत का पठार दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक हैं, क्योंकि यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे से टकरा रही हैं। इसी टकराव के कारण यह पूरा इलाका भूकंप के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।

मायने और प्रभाव: भारत और क्षेत्र के लिए क्यों अहम हैं ये भूकंप?

तिब्बत और आसपास के क्षेत्रों में लगातार आ रहे ये भूकंप भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले, यह दर्शाता है कि हिमालयी बेल्ट, जो भारत के उत्तरी राज्यों से सटा है, भूगर्भीय रूप से बेहद सक्रिय है। तिब्बत में आने वाले बड़े भूकंपों का असर अक्सर नेपाल और भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों तक महसूस किया जाता है। इससे इन क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और तैयारियों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

दूसरा, लगातार छोटे-मोटे झटके या तो बड़ी ऊर्जा के धीरे-धीरे निकलने का संकेत हो सकते हैं, या फिर यह भी हो सकता है कि किसी बड़े भूकंप की तैयारी हो रही हो। हालांकि, भूकंप की भविष्यवाणी करना अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में, आम जनता को जागरूक रहने और भूकंपरोधी निर्माण तकनीकों पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन को पड़ोसी देशों की भूगर्भीय गतिविधियों पर पैनी नजर रखनी होगी और अपनी आपदा प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करना होगा। यह सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू भी है।

Image Source: www.indiatv.in

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments