अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन की ‘चालबाजी’ जारी: ITBP प्रमुख की चेतावनी, विदेश मंत्रालय की दो टूक
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर गहरा गया है, खासकर संवेदनशील अरुणाचल प्रदेश में। इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर के हालिया बयान ने इस बात की पुष्टि की है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं। इन झड़पों को विदेश मंत्रालय ने चीन द्वारा ‘गश्त के स्थापित पैटर्न से विचलन’ का नतीजा बताया है।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भी शामिल थी। लेकिन सीमा पर चीन की हरकतों से शांति और स्थिरता बनाए रखने की भारत की कोशिशों को झटका लगा है।
ITBP प्रमुख ने खोली सीमा पर तनाव की पोल
ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अरुणाचल प्रदेश में LAC के कुछ चुनिंदा बिंदुओं पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध बना हुआ है, जो ‘अभी भी जारी’ है। उन्होंने हालांकि, अपनी फोर्स के ‘शौर्य’ कमांडो की तारीफ की, जिन्होंने इन झड़पों से ‘उत्कृष्ट’ तरीके से निपटा है।
कपूर ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को पारंपरिक सैन्य संसाधनों और बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करना होगा। ITBP ने अपनी सभी सीमा इकाइयों के लिए ड्रोन प्लाटून शामिल किए हैं और आधुनिकीकरण के लिए आवंटित ₹400 करोड़ में से 70% ड्रोन युद्ध क्षमताओं पर खर्च किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय की चीन को खरी-खरी
ITBP प्रमुख के बयान के एक दिन बाद, शुक्रवार को विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने सीधे तौर पर हालिया झड़पों का विवरण नहीं दिया, बल्कि इसे रक्षा मंत्रालय के पाले में डाल दिया। हालांकि, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि चीन द्वारा ‘गश्त के स्थापित पैटर्न से विचलन’ के कारण सीमावर्ती इलाकों में समय-समय पर अशांति पैदा होती है।
मंत्रालय ने दोहराया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए ‘अनिवार्य’ है। यह वही संदेश है जो प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले महीने शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान दिया था। दोनों देश LAC की बेहतर समझ के लिए भी चर्चा करने पर सहमत हुए हैं।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
ITBP प्रमुख के बयान के बाद, विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि क्या लद्दाख में मई 2020 से पहले की यथास्थिति बहाल हो गई है और क्या भारतीय सैनिक अरुणाचल प्रदेश में शेरा-5 जैसे सीमा बिंदुओं तक गश्त कर पा रहे हैं।
खेड़ा ने सरकार से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग की ताकि यह पता चल सके कि क्या चीन ने भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीन को ‘क्लीन चिट’ दे रही है, जबकि चीन की आक्रामकता जारी है और भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ा है।
मायने और प्रभाव
अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन की लगातार ‘चालबाजी’ और ITBP प्रमुख का यह खुला बयान, भारतीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए कई गहरे मायने रखता है। सबसे पहले, यह दर्शाता है कि LAC पर स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और चीन की आक्रामक नीतियां कम नहीं हुई हैं, भले ही कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी हो। यह भारत के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि उसे अपनी सीमा सुरक्षा को लगातार मजबूत करना होगा, खासकर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन के इस्तेमाल पर जोर देना होगा।
आम जनता के लिए, यह खबर राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ाती है। सीमा पर तनाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ सकता है। सरकार पर पारदर्शिता बनाए रखने और जनता को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने का दबाव बढ़ेगा। विपक्ष के आरोपों से यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र भी बनेगा, जिससे सरकार को अपनी नीतियों और तैयारियों पर अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा। अंततः, यह स्थिति भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मजबूत कूटनीतिक रुख अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
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