कनाडा में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का आतंक अब एक नए और भयावह मोड़ पर पहुँच गया है। एक चौंकाने वाले खुलासे में सामने आया है कि भारत से संचालित इस कुख्यात गैंग ने पिछले साल कनाडा की एक पुलिस चौकी को धमकी भरा पत्र भेजा था। इस पत्र में गैंग ने दावा किया था कि उसके पास 1,000 ऐसे ‘फुट सोल्जर’ हैं जो गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार बैठे हैं।
यह सनसनीखेज जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को एक निर्वासन सुनवाई (deportation hearing) के दौरान दी। इस खुलासे ने कनाडा में जबरन वसूली (extortion) के बढ़ते संकट को और भी गंभीर बना दिया है।
बिश्नोई गैंग का बेखौफ धमकी भरा पत्र
ब्रिटिश कोलंबिया (बी.सी.) के अब्बॉट्सफोर्ड स्थित पुलिस स्टेशन को 13 अगस्त को भेजे गए इस पत्र में, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने अपनी आपराधिक संगठन की ताकत का बखान किया था। कांस्टेबल केविन सेंट लुईस ने आव्रजन और शरणार्थी बोर्ड को बताया कि पत्र में साफ लिखा था कि उनके पास 1,000 से अधिक लोग हैं जो उनके समूह के हिस्से के रूप में गोलीबारी करने को तैयार हैं।
पत्र में यह भी इशारा किया गया था कि ‘हर व्यवसाय को उनका टैक्स चुकाना होगा’, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह समूह जबरन वसूली के माध्यम से कितना पैसा कमाना चाहता है। अब्बॉट्सफोर्ड पुलिस विभाग ने इस पत्र की पुष्टि की है और बताया कि इसकी जानकारी कनाडा भर में जबरन वसूली से लड़ने वाले कानून प्रवर्तन भागीदारों के साथ साझा की गई है।
भारत से ऑपरेट हो रहा है बिश्नोई गैंग
जांचकर्ताओं के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई, जो 2015 से भारतीय जेल में बंद है, वहीं से अपने इस आपराधिक समूह का संचालन कर रहा है। यह गैंग कनाडा में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को निशाना बनाकर अपराध की एक लहर चला रहा है। गैंग जबरन वसूली के लिए कनाडा में रह रहे भारतीय नागरिकों का इस्तेमाल करता है, जिन्हें ‘छोटे’ भुगतान के बदले गोलीबारी जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई लोग समूह का हिस्सा बनने की भावना के कारण इसमें शामिल होते हैं।
सेंट लुईस ने बताया कि इस जांच में सामने आए अधिकांश लोग अस्थायी विदेशी कर्मचारी (temporary foreign worker) या छात्र वीजा पर कनाडा आए हुए हैं और वे कनाडा में नए हैं। गैंग के सदस्य व्हाट्सएप के जरिए दक्षिण एशियाई व्यवसायियों और व्यक्तियों से बड़ी रकम की मांग करते हैं। यदि पीड़ित भुगतान नहीं करते हैं, तो उनके घरों और व्यवसायों पर गोलियां चलाई जाती हैं।
बदलती रणनीति और पुलिस की चुनौतियाँ
जबरन वसूली की मांग अक्सर व्हाट्सएप पर की जाती है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई या उसके पूर्व दाहिने हाथ गोल्डी बरार (Goldy Brar) का नाम लिया जाता है। हालांकि, अधिकांश कॉल जौरा सिद्धू (Jora Sidhu) नामक एक अन्य बिश्नोई सदस्य द्वारा की जाती हैं, जो कनाडा में नहीं रहता।
पिछले साल बिश्नोई और बरार के बीच हुए मतभेद के बाद गैंग की रणनीति में बदलाव आया है। अब गैंग के सदस्य पहले पैसे की मांग किए बिना ही घरों और व्यवसायों पर गोलीबारी करने लगे हैं, जो एक हद तक ‘अव्यवस्था’ को दर्शाता है। इसके अलावा, कॉपीकैट समूह भी सामने आए हैं जो बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन वे गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम नहीं देते।
पुलिस के सामने भी कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का उपयोग और अंतर्राष्ट्रीय फ़ोन नंबर शामिल हैं। हथियारों को प्रांतों के बीच इतनी तेज़ी से ले जाया जाता है कि उन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है।
खालिस्तानी लिंक और भारत पर गंभीर आरोप
कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) जबरन वसूली संकट से निपटने के लिए निर्वासन (deportation) को मुख्य हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, क्योंकि अधिकांश सदस्य कनाडाई नागरिक नहीं हैं। 7 मई तक, CBSA ने जबरन वसूली के 446 संदिग्धों के खिलाफ जांच शुरू की थी और 118 निष्कासन आदेश जारी किए थे, जिनमें से 55 को पहले ही निर्वासित किया जा चुका है।
एक आंतरिक RCMP (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिश्नोई समूह कनाडा में ‘हत्या के लिए सुपारी’ (murder-for-hire) में भी शामिल है, और ‘भारतीय सरकार की ओर से काम कर रहा है।’ RCMP का मानना है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग को 2023 में बी.सी. सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या के लिए भारत द्वारा कथित तौर पर ‘ट्रांसनेशनल दमन’ के एक कृत्य के रूप में काम पर रखा गया था।
भारत सरकार पर एक दूसरे कनाडाई खालिस्तान कार्यकर्ता की हत्या के प्रयास में भी शामिल होने का आरोप है, जो न्यूयॉर्क में रहता है। हालांकि, भारत इन सभी आरोपों से इनकार करता रहा है।
मायने और प्रभाव
लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा कनाडा में भेजी गई यह धमकी भरी चिट्ठी सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर सवालों को जन्म देती है। सबसे पहले, यह कनाडा में रह रहे दक्षिण एशियाई समुदाय, खासकर भारतीय छात्रों और अस्थायी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करती है। कमजोर पृष्ठभूमि वाले इन लोगों को आसानी से बहकाया या डराया जा सकता है, जिससे वे अपराध की दुनिया का हिस्सा बन जाते हैं।
दूसरा, यह घटना अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के बढ़ते दायरे और उसके संचालन की जटिलता को दर्शाती है। भारतीय जेल से एक अपराधी का कनाडा में बैठकर अपने नेटवर्क को चलाना, दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
तीसरा और सबसे संवेदनशील पहलू, खालिस्तानी आंदोलन और भारत सरकार पर लगे आरोपों का है। RCMP की रिपोर्ट में बिश्नोई गैंग को निज्जर की हत्या के लिए भारत सरकार से जोड़ने का आरोप, भारत-कनाडा संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है। यह घटना कनाडा की संप्रभुता और उसकी धरती पर विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ती है। आम जनता के लिए इसका मतलब है कि उनके आसपास का माहौल अब पहले से कहीं अधिक अनिश्चित और खतरनाक हो सकता है, जहाँ अपराध और राजनीति के धागे इस तरह उलझ गए हैं कि उन्हें सुलझाना बेहद मुश्किल है।
Image Source: globalnews.ca



