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गोरखपुर के ‘गोद लिए’ पार्क खंडहर में तब्दील: शहर की हरियाली पर संकट!

गोरखपुर (Gorakhpur) में शहर के छह "गोद लिए" पार्क (Adopted Parks) अब खंडहर (Dilapidated) बन चुके हैं। जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) और अधिकारियों द्वारा अपनाए गए इन पार्कों की बदहाली ने शहर के सौंदर्यीकरण (Beautification) और रखरखाव (Maintenance) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गोद लिए पार्कों की बदहाली

गोरखपुर शहर में हरियाली और मनोरंजन के लिए विकसित किए गए छह पार्क आज अपनी पहचान खो चुके हैं। कभी इन्हें शहर के गणमान्य लोगों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने "गोद" लिया था, ताकि उनका बेहतर रखरखाव (Maintenance) और विकास (Development) हो सके।

  • आज इन पार्कों में टूटे झूले (Broken Swings), उखड़ी बेंचें (Uprooted Benches) और झाड़ियाँ (Overgrown Bushes) ही दिखाई देती हैं।
  • बच्चों के खेलने की जगह अब आवारा पशुओं (Stray Animals) का ठिकाना बन गई है।
  • स्थानीय निवासियों (Local Residents) में इसे लेकर भारी निराशा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि गोद लेने से पार्कों की दशा सुधरेगी।

निगम की लापरवाही या फंड का अभाव?

इन पार्कों की बदहाली सीधे तौर पर नगर निगम (Municipal Corporation) और गोद लेने वाले व्यक्तियों की जवाबदेही (Accountability) पर सवाल उठाती है। रखरखाव के लिए पर्याप्त फंड (Funds) की कमी या फिर इच्छाशक्ति (Willpower) का अभाव, यह बड़ा प्रश्न है।

  • पार्कों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं (Basic Amenities) के लिए आवंटित बजट (Budget) का सही उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा, यह जांच का विषय है।
  • शहर के नागरिकों को स्वच्छ और हरे-भरे सार्वजनिक स्थान (Public Spaces) उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी (Primary Responsibility) है।

विशेषण और विचार (News & Views)

गोरखपुर में जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी ही "गोद लिए" पार्कों की सुध नहीं ले पा रहे, तो आम जनता से सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और रखरखाव में भागीदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है? क्या यह सिर्फ फोटो खिंचवाने का एक जरिया बनकर रह गया है, या वाकई शहर को सुंदर बनाने की कोई ठोस योजना है?

* Thumbnail is AI Generated

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