हनीमून पर खुशियों की जगह खौफनाक मंजर
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की एक नवविवाहिता के साथ हनीमून पर जो हुआ, वो किसी दुःस्वप्न से कम नहीं। अंडमान जैसे खूबसूरत द्वीप पर, जहां नए रिश्ते की नींव मजबूत होनी थी, वहीं पति ने अपनी पत्नी के साथ बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि सिर्फ पीरियड्स आने की बात पर पति इतना आगबबूला हो गया कि उसने पत्नी को बेरहमी से पीटा और जान लेने की कोशिश तक की।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज में गहराती एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है। गोरखपुर पुलिस अब इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
अंडमान में हुई दरिंदगी
पीड़ित महिला ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया है कि उनकी शादी साल 2023 में दिल्ली में हुई थी। शादी के करीब एक महीने बाद, 4 जुलाई को वह अपने पति के साथ हनीमून के लिए अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह गई थीं। यात्रा के दौरान ही उन्हें पीरियड्स आ गए, जिससे उन्हें पेट में तेज दर्द और अधिक रक्तस्राव की शिकायत हुई।
महिला का आरोप है कि इस बात पर उनके पति को इतना गुस्सा आया कि उसने मारपीट शुरू कर दी। पति ने उनसे पूछा कि उन्होंने पहले पीरियड्स की जानकारी क्यों नहीं दी। बात इतनी बढ़ गई कि पति ने उन्हें थप्पड़ और घूंसे मारे, और हद तो तब हो गई जब उसने गला दबाने की कोशिश भी की। हालांकि, महिला के शोर मचाने पर होटल के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और किसी तरह उनकी जान बचाई।
दहेज की मांग और शादी से पहले दबाव
यह मामला सिर्फ हनीमून पर हुई मारपीट तक सीमित नहीं है। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि शादी से पहले उनके ससुराल वालों ने दहेज की भारी मांग की थी। उनके परिवार से दिए जाने वाले सभी सामान के ब्रांडेड होने पर जोर दिया गया था।
महिला के पिता ने करीब 20 लाख रुपये नकद, एक महंगी कार और लगभग 40 लाख रुपये की कीमत का अन्य सामान दहेज के तौर पर दिया था। शादी के महज 45 दिन बाद, 14 जुलाई 2023 को महिला को दिल्ली स्थित ससुराल से भी निकाल दिया गया। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर उनके पति, सास और ननद के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
मायने और प्रभाव: समाज को देती यह खबर क्या संदेश?
गोरखपुर से सामने आई यह खबर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे पहले, यह वैवाहिक रिश्तों में बढ़ती हिंसा और महिलाओं के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करती है। हनीमून जैसे पवित्र अवसर पर, शारीरिक प्रक्रिया को लेकर ऐसी क्रूरता दिखाना पति की मानसिकता पर सवालिया निशान लगाता है। यह घटना महिला के शरीर पर उसके अपने अधिकार (bodily autonomy) को नकारने का एक भयावह उदाहरण है।
दूसरा, दहेज की मांग और उसके बाद उत्पीड़न की कहानी बताती है कि आज भी समाज में यह कुप्रथा कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए है। भले ही कानून सख्त हों, लेकिन लालच और दबंगई के आगे कई परिवार टूट रहे हैं। इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाओं में पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों को सख्त सजा हो। यह खबर गोरखपुर और आसपास के इलाकों में आम जनता को घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।



