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ट्रम्प के टैरिफ: कनाडा का दांव, टेक्सास में अमेरिकी मतदाताओं की बेफिक्री क्यों?

ट्रम्प के टैरिफ: कनाडा का दांव, टेक्सास में अमेरिकी मतदाताओं की बेफिक्री क्यों?

डलास, टेक्सास: अमेरिका और कनाडा के बीच छिड़ा व्यापार युद्ध दिनों-दिन गहराता जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसका सीधा आर्थिक असर झेल रहे अमेरिकी मतदाता, खासकर टेक्सास में, इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं। कनाडा ने सोचा था कि टैरिफ से होने वाला आर्थिक दर्द अमेरिकी मध्यवर्ती चुनावों में डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ वोटों में तब्दील होगा, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

टेक्सास के एक धातु निर्माता लांस थ्रेलकिल के दफ्तर में कनाडा का एक भरा हुआ हंस टंगा है, जो शायद इस व्यापारिक तकरार का प्रतीक बन गया है। उनकी कंपनी, ऑल मेटल्स फैब्रिकेटिंग, में एल्यूमीनियम की कीमतें मार्च 2025 से 84% तक बढ़ चुकी हैं। अकेले 2026 में यह 40% का इजाफा है, जिसका सीधा बोझ उनके कारोबार पर पड़ रहा है।

टेक्सास में व्यापार युद्ध की जमीनी हकीकत

कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाकर ट्रम्प को उनके ही घर में चुनौती देने की कोशिश की थी। ओंटारियो के प्रमुख डग फोर्ड ने टेक्सास जैसे राजनीतिक रूप से अहम राज्यों को निशाना बनाने का सुझाव दिया, ताकि वहां के मतदाताओं पर दबाव बने और वे ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ खड़े हों। कनाडा ने $27.6 बिलियन मूल्य के अमेरिकी सामानों पर 50% टैरिफ लगाए, जिसका मकसद था आर्थिक चोट पहुंचाकर राजनीतिक फायदा उठाना।

टेक्सास और कनाडा के बीच आर्थिक संबंध काफी गहरे हैं। 2025 में दोनों के बीच लगभग $69 बिलियन का व्यापार हुआ था। टेक्सास में 830 कनाडाई स्वामित्व वाले व्यवसाय 104,000 से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। प्लास्टिक से लेकर वाहन पुर्जों तक, दोनों तरफ से बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान होता है। रेड ओक में बॉम्बार्डियर का कारखाना, जहां जेट के पंख बनते हैं, 440 टेक्सास कर्मचारियों को रोजगार देता है। फिर भी, इस व्यापारिक रिश्ते की अहमियत आम टेक्सासियों के लिए ‘अंडर द राडार’ है।

कनाडा का दांव: सियासी खेल या आर्थिक चोट?

कनाडा का दांव था कि टैरिफ से होने वाली आर्थिक परेशानी ट्रम्प के खिलाफ जनमत तैयार करेगी, खासकर मध्यवर्ती चुनावों से पहले। लेकिन जब डलास में रिपब्लिकन पार्टी का पहला मध्यवर्ती सम्मेलन हुआ, तो कनाडा के साथ व्यापार विवाद का मुद्दा शायद ही कहीं सुनाई दिया। कई टेक्सास के मतदाता इससे या तो अनजान थे, या इसे ट्रम्प के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का हिस्सा मानकर स्वीकार कर रहे थे।

लांस थ्रेलकिल जैसे लोग, जो बढ़ती लागतों से जूझ रहे हैं, वे भी ट्रम्प की नीतियों का समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि ट्रम्प अपने वादे निभाते हैं, भले ही उनकी बातचीत का तरीका ‘गलत’ हो। यह दिखाता है कि आर्थिक नुकसान के बावजूद, ट्रम्प के प्रति वफादारी और उनके ‘अमेरिका का फायदा उठाया जा रहा है’ वाले बयान पर विश्वास मतदाताओं के लिए ज्यादा मायने रखता है।

ट्रम्प की वफादारी: टैरिफ पर भारी

डलास सम्मेलन को ‘ट्रम्प-ए-पालूजा’ कहा गया। ट्रम्प ने खुद कहा कि ‘मान लीजिए मैं मतपत्र पर हूं’, जिससे यह चुनाव उनके व्यक्तित्व और नीतियों पर जनमत संग्रह बन गया। एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतों या कनाडा के जवाबी टैरिफ के बजाय, रिपब्लिकन मतदाता ट्रम्प की मजबूत नेतृत्व क्षमता और ‘अमेरिका को दूसरों द्वारा फायदा उठाने से रोकने’ की उनकी इच्छा को प्राथमिकता दे रहे थे।

पूर्व ट्रम्प व्हाइट हाउस प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने स्वीकार किया कि कुछ सीमावर्ती राज्यों में टैरिफ एक ‘कठिन बिक्री’ हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर, रिपब्लिकन मतदाता ट्रम्प के ‘लड़ने’ के साहस को सराहते हैं। कई लोगों का मानना था कि अमेरिका को लंबे समय से ‘फ्री राइड’ दी जा रही थी और अब ‘सबको थोड़ा नुकसान उठाना होगा’। कुछ तो यहां तक मानते थे कि कनाडा को अमेरिका की जरूरत ज्यादा है, न कि इसके उलट।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों अहम?

यह खबर आम जनता के लिए कई मायनों में अहम है। यह दिखाती है कि कैसे जटिल अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां और भू-राजनीतिक दांव घरेलू राजनीति और मतदाताओं की भावनाओं से गहरे जुड़े होते हैं। भले ही ट्रम्प के टैरिफ से टेक्सास के व्यवसायों को सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन कई मतदाता व्यापक राजनीतिक एजेंडे और नेता के प्रति अपनी वफादारी के कारण इस दर्द को नजरअंदाज करने को तैयार हैं।

इससे पता चलता है कि आर्थिक तर्क हमेशा राजनीतिक निर्णयों पर हावी नहीं होते। राष्ट्रीय गौरव, ‘अमेरिका फर्स्ट’ जैसी भावनाएं और एक नेता की छवि, जो अपने देश के लिए ‘लड़ने’ को तैयार है, अक्सर बढ़ती कीमतों या व्यापारिक बाधाओं के प्रभाव को कम कर देती है। आम लोगों को यह समझना होगा कि नेताओं के बयानों और नीतियों के पीछे की वास्तविक आर्थिक लागतें क्या हैं और उनकी राजनीतिक वफादारी उनके अपने बटुए को कैसे प्रभावित कर सकती है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि ध्रुवीकृत राजनीतिक माहौल में, आर्थिक दबाव भी हमेशा राजनीतिक परिणाम नहीं बदल पाता।

Image Source: globalnews.ca

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