क्या आप भी सोच रहे हैं कि इस बार मानसून का मिजाज इतना बदलता क्यों दिख रहा है? कहीं झमाझम बारिश तो कहीं उमस से पसीने छूट रहे हैं। मौसम विभाग ने अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से गर्मी और उमस फिर से लोगों को सता सकती है।
पूर्वी तराई के 13 जिलों में येलो अलर्ट
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश के तराई बेल्ट के 13 जिलों में आज (12 जुलाई, 2026) भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।
धीमी हुई मानसून की रफ्तार, बढ़ेगी उमस
वहीं, प्रदेश के अन्य हिस्सों में मानसून की सक्रियता में कमी आई है। पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश का दौर अब धीमा पड़ रहा है। इसका सीधा असर यह होगा कि अगले कुछ दिनों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी और लोगों को एक बार फिर उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। खासकर मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह स्थिति ज्यादा देखने को मिल सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ लाइन की स्थिति में बदलाव के कारण ऐसा हो रहा है। ट्रफ लाइन अभी हिमालय की तलहटी की ओर खिसक गई है, जिससे पूर्वी तराई के जिलों में बारिश हो रही है, जबकि बाकी जगहों पर नमी और गर्मी बढ़ रही है।
मायने और प्रभाव
इस बदलते मौसम का आम जनता और खासकर किसानों पर गहरा असर पड़ेगा।
- किसानों पर असर: जिन किसानों ने अभी धान की रोपाई की है या करने वाले हैं, उनके लिए पूर्वी तराई की बारिश राहत लेकर आएगी। हालांकि, जिन इलाकों में मानसून कमजोर पड़ा है, वहां सिंचाई के लिए दिक्कतें बढ़ सकती हैं। अत्यधिक बारिश से जलभराव भी फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: उमस बढ़ने से लोगों को पसीना और बेचैनी महसूस होगी। इससे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ सकता है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ेगा।
- रोजमर्रा की जिंदगी: पूर्वी तराई में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। सड़कों पर जलभराव, बिजली कटौती और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। वहीं, अन्य इलाकों में उमस से लोग परेशान रहेंगे।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था: बारिश और उमस दोनों ही स्थानीय बाजारों और छोटे व्यापारियों पर असर डाल सकती हैं। निर्माण कार्य और कृषि से जुड़े कामों में भी बाधा आ सकती है।
कुल मिलाकर, यह मौसम का मिलाजुला मिजाज उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह से प्रभाव डालेगा। लोगों को मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।
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