अगले साल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भारत सिर्फ कूटनीति का मंच ही नहीं, बल्कि अपनी स्वाद और संस्कृति का भी भव्य प्रदर्शन करेगा। कल्पना कीजिए, जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग जैसे दुनिया के ताकतवर नेता भारतीय व्यंजनों का लुत्फ उठाएंगे, तो कैसा नजारा होगा!
हाल ही में सामने आए ब्यौरे के मुताबिक, इस प्रतिष्ठित सम्मेलन के दौरान मेहमानों के लिए तैयार किया गया डिनर मेन्यू और खास मीडिया किट भारत की विविधता को बखूबी दर्शाएगा। यह सिर्फ खाने की बात नहीं, बल्कि भारत की ‘अतिथि देवो भव’ परंपरा का एक शानदार उदाहरण है।
शिखर सम्मेलन 2026 में ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत इस वैश्विक मंच पर अपनी सांस्कृतिक विरासत और लजीज व्यंजनों के जरिए एक अमिट छाप छोड़ने की तैयारी में है।
‘शाही डिनर’ में परोसे जाएंगे कौन-कौन से पकवान?
ब्रिक्स नेताओं के लिए जो डिनर मेन्यू तैयार किया गया है, वह भारत के अलग-अलग कोनों से जायकों का संगम है। इसमें उत्तर भारत के क्रीमी पनीर लबाबदार से लेकर दक्षिण भारत के हल्के-फुल्के डोसा-उपमा तक सब कुछ शामिल है।
मेहमानों को लखनवी कबाब का शाही स्वाद मिलेगा तो वहीं राजस्थानी कचौड़ी का चटपटापन भी उन्हें लुभाएगा। शाकाहारी विकल्पों में पोहा, स्टफ्ड पराठे और दाल-चावल जैसे रोजमर्रा के स्वादिष्ट व्यंजन भी शामिल हैं।
मिठाई के शौकीनों के लिए फ्रूट क्रीम जलेबी और अन्य भारतीय मिठाइयों का खास इंतजाम किया गया है, जो उनके स्वाद को और बढ़ा देगा।
मीडिया किट में भारत की क्षेत्रीय पहचान
सिर्फ खाने में ही नहीं, बल्कि ब्रिक्स मीडिया सेंटर में पत्रकारों और प्रतिनिधियों को दी जाने वाली मीडिया किट में भी भारत की क्षेत्रीय विविधता की झलक मिलेगी।
इस खास किट में बिहार का प्रसिद्ध सत्तू और मखाना शामिल होगा, जो न केवल पौष्टिक हैं बल्कि बिहार की मिट्टी की पहचान भी हैं। ओडिशा की खास कॉफी और गुजरात का पारंपरिक स्टोल भी इस किट का हिस्सा होगा।
यह मीडिया किट सिर्फ जानकारी का साधन नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति और उत्पादों का एक छोटा सा नमूना है, जिसे दुनिया भर के पत्रकार अपने साथ लेकर जाएंगे।
मायने और प्रभाव
यह खबर सिर्फ ब्रिक्स नेताओं के खाने के मेन्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे मायने हैं। यह भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का एक बेहतरीन उदाहरण है।
जब दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेता भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखते हैं और क्षेत्रीय उत्पादों को देखते हैं, तो यह सीधे तौर पर भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन होता है। यह हमारे पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है और स्थानीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार के दरवाजे खोल सकता है।
आम जनता के लिए इसका मतलब यह है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी पहचान को और मजबूत कर रहा है। यह हमारे कारीगरों, किसानों और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन देता है, जिनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाते हैं। यह गर्व का क्षण है कि हमारी संस्कृति और स्वाद अब वैश्विक चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।



