उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाज जवानों के परिवारों के लिए एक बेहद अहम और मानवीय खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने मृतक आश्रित कोटे के तहत भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा, यानी ‘दौड़’ से छूट देने की तैयारी कर ली है।
लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर अब विराम लगने वाला है। आगामी कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगते ही, उन सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके सदस्य पुलिस सेवा में रहते हुए इस दुनिया से चले गए।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
दरअसल, मौजूदा नियमों के तहत मृतक आश्रित कोटे से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को भी सामान्य शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) पास करनी होती थी। कई बार ऐसे आवेदक अधिक उम्र के होते थे या उनकी शारीरिक स्थिति दौड़ के लिए अनुकूल नहीं होती थी, जिससे उन्हें नौकरी मिलने में परेशानी आती थी।
इस नियम को अमानवीय और अव्यावहारिक माना जा रहा था। यह उन परिवारों के लिए दोहरा सदमा था, जिन्होंने एक तरफ अपने प्रियजन को खोया और दूसरी तरफ उनके आश्रितों को नौकरी के लिए कठिन शारीरिक परीक्षा से गुजरना पड़ता था।
क्या है नया प्रस्ताव?
लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने अब इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ लिया है। नए प्रस्ताव के तहत, मृतक आश्रित कोटे में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को दौड़ की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि उन्हें अब नौकरी पाने के लिए दौड़ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह फैसला पुलिस विभाग और दिवंगत कर्मियों के परिवारों के कल्याण के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उम्मीद है कि जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
मायने और प्रभाव
यह निर्णय सिर्फ एक नियम में बदलाव भर नहीं है, बल्कि इसके गहरे मानवीय और सामाजिक मायने हैं। सबसे पहले, यह उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्होंने देश और समाज की सेवा में अपने घर का चिराग खोया है। अब उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।
दूसरा, यह कदम पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने में भी सहायक होगा। जब पुलिसकर्मी यह देखेंगे कि उनके न रहने पर सरकार उनके परिवार का पूरा ख्याल रख रही है, तो वे और अधिक समर्पण भाव से अपने कर्तव्यों का पालन कर पाएंगे। यह सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है कि वह अपने कर्मियों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशील है।
आम जनता के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि सरकारी नीतियां मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं। यह फैसला न केवल एक वर्ग विशेष को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि समाज में न्याय और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत करेगा। यह यूपी पुलिस की भर्ती प्रक्रिया में एक सकारात्मक और दूरगामी बदलाव साबित होगा।
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