रोम में ‘अंडरडॉग’ आंद्रेया पेलेग्रिनो का धमाल: सिनर से ‘हार’ का बदला लेने को तैयार?
इटली की राजधानी रोम में चल रहे प्रतिष्ठित एटीपी रोम मास्टर्स 1000 टेनिस टूर्नामेंट में इन दिनों एक ऐसी कहानी लिखी जा रही है, जो किसी फिल्म से कम नहीं। 29 साल के अज्ञात खिलाड़ी आंद्रेया पेलेग्रिनो ने अपनी शानदार परफॉर्मेंस से सबको हैरान कर दिया है। क्वालीफाइंग राउंड से मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने वाले पेलेग्रिनो अब टूर्नामेंट के अंतिम 16 में पहुंच गए हैं, जहां उनका मुकाबला दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी जानिक सिनर से होगा। यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि सात साल पुराना एक हिसाब भी है, जिसे आंद्रेया पेलेग्रिनो चुकाना चाहते हैं!
कौन हैं यह आंद्रेया पेलेग्रिनो?
पुगलिया क्षेत्र से आने वाले आंद्रेया पेलेग्रिनो टेनिस जगत में एक ‘अंडरडॉग’ के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी रैंकिंग कभी टॉप-100 के करीब भी नहीं रही और उन्होंने कभी किसी ग्रैंड स्लैम के क्वालीफाइंग राउंड को भी पार नहीं किया था। लेकिन रोम की लाल बजरी पर इस बार उन्होंने कमाल कर दिखाया है। उन्होंने मार्टिन लैंडालूस और फ्रांसिस टियाफो जैसे मजबूत खिलाड़ियों को हराकर अंतिम 16 में अपनी जगह पक्की की है, जिससे टेनिस प्रेमियों की निगाहें उन पर टिक गई हैं।
सिनर से पुराना हिसाब: ‘पहले भी मुझे तबाह कर चुका है’
यह मुकाबला सिर्फ वर्तमान की भिड़ंत नहीं, बल्कि अतीत की गूंज भी है। साल 2019 में, जब जानिक सिनर ने अपना पहला चैलेंजर खिताब जीता ही था, तब उनका मुकाबला सांता मार्गेरिटा डी पूला में एक फ्यूचर टूर्नामेंट के फाइनल में आंद्रेया पेलेग्रिनो से हुआ था। उस मैच में सिनर ने पेलेग्रिनो को 6-1, 6-1 से करारी शिकस्त दी थी।
अपनी पुरानी हार को याद करते हुए आंद्रेया पेलेग्रिनो ने कहा, ”मुझे साफ याद है कि मुझे बुरी तरह पीटा गया था। मैं ज्यादा कुछ याद नहीं रख पाता, सिवाय इसके कि मैं बहुत आसानी से हार गया था। जानिक बहुत युवा था और उसने अपना पहला चैलेंजर जीत लिया था, वह पहले से ही एक बहुत मजबूत खिलाड़ी था। वह अब जो कर रहा है, वह असाधारण है। वह अपनी ही लीग में है।”
पेलेग्रिनो ने आगे कहा, ”मैं कल कोर्ट पर जाऊंगा और बस मस्ती करने की कोशिश करूंगा। यह बहुत रोमांचक होने वाला है, सेंट्रल कोर्ट पर 10,000 लोगों के सामने खेलना, दुनिया के सबसे मजबूत खिलाड़ी का सामना करना… यह एक अविस्मरणीय अहसास होगा।”
बदले हुए एटीपी फॉर्मेट का कमाल
एटीपी ने हाल ही में मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट्स को दो सप्ताह के ‘मेगा इवेंट्स’ में बदलने का फैसला किया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आंद्रेया पेलेग्रिनो जैसे ‘सामान्य’ खिलाड़ियों को मिला है। ड्रॉ का आकार बढ़ने से टॉप-100 से बाहर के खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर चमकने का मौका मिल रहा है। यह फॉर्मेट उन खिलाड़ियों के लिए एक नया रास्ता खोल रहा है, जो सालों से कड़ी मेहनत कर रहे हैं लेकिन बड़े टूर्नामेंट्स में जगह नहीं बना पाते।
मायने और प्रभाव: मेहनत और जज्बे की कहानी
आंद्रेया पेलेग्रिनो की यह कहानी सिर्फ एक टेनिस मैच तक सीमित नहीं है। यह उन अनगिनत खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो सालों तक संघर्ष करते हैं और हार नहीं मानते। 29 साल की उम्र में अपने करियर का सबसे शानदार प्रदर्शन करना यह दिखाता है कि सफलता की कोई उम्र नहीं होती। यह दिखाता है कि कड़ी मेहनत, लगन और खुद पर विश्वास आपको कभी भी उस मुकाम तक पहुंचा सकता है, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की थी।
पेलेग्रिनो ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, ”पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण वो भावनाएं हैं जो यह टूर्नामेंट मुझे दे रहा है, जो लोग मुझे चीयर करने आए हैं, वह किसी भी पैसे की राशि से कहीं ज्यादा मायने रखता है। हर व्यक्ति का परिपक्वता का अपना रास्ता होता है। कुछ जल्दी पहुंच जाते हैं, कुछ को अधिक समय लगता है। टेनिस में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां खिलाड़ियों ने तीस साल की उम्र में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जैसे पाओलो लोरेंजी। मैं 29 का हूं, लेकिन शारीरिक रूप से मैं बहुत युवा महसूस करता हूं। मुझे लगता है कि मेरे करियर के अभी कई साल बाकी हैं, ऐसे साल जिनमें मुझे उम्मीद है कि मैं ऐसे परिणाम हासिल करूंगा।”
आंद्रेया पेलेग्रिनो की यह यात्रा टेनिस के ‘अंडरडॉग’ की भावना का प्रतीक है। यह कहानी हमें बताती है कि खेल में सिर्फ जीत-हार ही नहीं, बल्कि जज्बा, संघर्ष और सपनों का पीछा करने की हिम्मत भी मायने रखती है। रोम में सिनर के खिलाफ उनका अगला मुकाबला सिर्फ एक टेनिस मैच नहीं, बल्कि एक ऐसे खिलाड़ी के सपने और दृढ़ संकल्प की परीक्षा होगी, जिसने हार न मानने की कसम खाई है।
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