कश्मीर की शांत वादियां एक बार फिर आतंकवादियों के लिए कब्रगाह बनी हैं। भारतीय सेना ने लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात कमांडर हाशिम मूसा को मार गिराया है, जिसने पहलगाम में कई आतंकी गतिविधियों की साजिश रची थी। उसकी मौत से पहले के चार दिन की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है, जहां वह अपनी जान बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा था।
आतंकी मूसा: मौत से पहले के आखिरी 4 दिन
खुफिया जानकारी और लगातार निगरानी के बाद भारतीय सेना ने पहलगाम के दुर्गम इलाकों में मूसा को घेर लिया। शुरुआती गोलीबारी में उसे चोट लगी, लेकिन वह घने जंगल का फायदा उठाकर छिपने में कामयाब रहा। अगले चार दिनों तक, घायल मूसा अपनी मौत से बचने के लिए जंगल में भटकता रहा।
हैरान करने वाली बात यह है कि मूसा अपने घावों को भरने के लिए शहद का इस्तेमाल कर रहा था। यह उसकी हताशा और बचने की आखिरी कोशिशों को दिखाता है।
पाकिस्तानी हैंडलर से लगातार संपर्क
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मूसा अपनी चोटों की तस्वीरें लगातार पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर को भेज रहा था। यह साफ दिखाता है कि पाकिस्तानी आका घायल आतंकी पर भी पैनी नजर रखे हुए थे और उसे निर्देश दे रहे थे। यह भारत के खिलाफ पाकिस्तान की लगातार साजिशों का एक और प्रमाण है।
मुठभेड़ स्थल के पास से सेना को एक संदिग्ध बैग भी मिला है। इसमें दवाइयां, खाने का सामान और अन्य रसद सामग्री बरामद हुई है। यह इस बात का संकेत है कि मूसा को स्थानीय स्तर पर पनाह और मदद मिल रही थी, या उसने पहले से ही ऐसे ठिकाने बना रखे थे।
आतंकी की मौत, पाकिस्तान का दुष्प्रचार
हाशिम मूसा का मारा जाना लश्कर-ए-तैयबा के लिए एक बड़ा झटका है। वह पहलगाम में कई आतंकी साजिशों का मास्टरमाइंड था। कानपुर में शहीद शुभम दुबे की बहन ऐशन्या ने मूसा के मारे जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सेना ने शुभम की आत्मा का तर्पण किया है।
वहीं, पाकिस्तान हमेशा की तरह इस मुद्दे पर भी दुष्प्रचार कर रहा है। भारतीय सेना द्वारा मारे गए असली मूसा के बजाय, वह किसी ‘नकली मूसा’ को पेश करने की कोशिश कर रहा है ताकि अपनी आतंकी फंडिंग और समर्थन को छिपाया जा सके।
मायने और प्रभाव: क्यों अहम है मूसा का खात्मा?
- आतंकवाद पर चोट: मूसा जैसे खूंखार आतंकी का खात्मा कश्मीर घाटी में शांति और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह लश्कर-ए-तैयबा जैसी आतंकी संगठनों की कमर तोड़ने का काम करता है।
- सेना का दबदबा: सेना का यह सफल ऑपरेशन न सिर्फ आतंकवादियों को कड़ा संदेश देता है, बल्कि उनके पाकिस्तानी आकाओं को भी चेतावनी है कि भारतीय धरती पर कोई भी आतंकी बच नहीं पाएगा। यह भारतीय सेना की मुस्तैदी और क्षमता को दर्शाता है।
- स्थानीय सुरक्षा: स्थानीय जनता के बीच सेना के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। पहलगाम और आसपास के इलाकों में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने में यह बड़ी कामयाबी है।
- पाकिस्तान का पर्दाफाश: यह कार्रवाई पाकिस्तान के दुष्प्रचार को भी बेनकाब करती है, जो आतंकियों को ‘शहीद’ बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करता है और सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देता है।
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