देश की शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच, NEET और NET परीक्षा में कथित धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में, दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी RML अस्पताल पहुंचे। उनका यह दौरा सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि सरकार पर सीधे हमले का संकेत था, जिसने इस गंभीर मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं।
राहुल गांधी ने RML अस्पताल में घायलों से मुलाकात की
दिल्ली के प्रतिष्ठित राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में राहुल गांधी ने उन छात्रों से मुलाकात की, जो ‘छात्र न्याय प्रिय’ (CJP) प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए थे। उन्होंने छात्रों का हाल जाना और उनकी आपबीती सुनी। इस दौरान उनके चेहरे पर छात्रों की पीड़ा साफ झलक रही थी।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। उन्होंने लाठीचार्ज की घटना को निंदनीय बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
संसद में भी गूंजा पेपर लीक का मुद्दा
संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा दिन भी NEET और NET पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामेदार रहा। विपक्ष ने इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी कोशिश की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए सरकार पर हमला बोला और छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की।
राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर मांग की कि इस संवेदनशील विषय पर सदन में तुरंत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और उनकी जायज आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का आक्रोश: ‘पीएम मोदी माफी मांगें, खामोश क्यों?’
कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे प्रकरण पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का कहना है कि लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन सरकार गंभीर नहीं दिख रही है। राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा कि वे इतने बड़े शिक्षा घोटाले पर खामोश क्यों हैं।
विपक्ष का आरोप है कि पेपर लीक की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, जिससे देश की शिक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा उठ रहा है। वे इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
मायने और प्रभाव
- छात्रों के मनोबल पर असर: यह घटनाक्रम सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए गहरे मायने रखता है। NEET और NET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में धांधली से योग्य छात्रों का मनोबल टूटता है और शिक्षा के प्रति उनका विश्वास डगमगाता है।
- सरकार पर बढ़ता दबाव: राहुल गांधी का RML अस्पताल जाकर घायल छात्रों से मिलना और संसद में इस मुद्दे को उठाना, छात्रों के आंदोलन को एक मजबूत राजनीतिक आवाज दे रहा है। यह सरकार पर दबाव बढ़ाएगा कि वह न केवल इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाए।
- राजनीतिक ध्रुवीकरण: यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक गलियारों में और गरमाएगा। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी के तौर पर पेश करेगा, जबकि सरकार को अपनी विश्वसनीयता बचाने के लिए मजबूत जवाबदेही दिखानी होगी। छात्रों का भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था इस समय एक चौराहे पर खड़ी है, जहां सही फैसले ही आगे का रास्ता तय करेंगे।
- शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता: बार-बार हो रहे पेपर लीक यह दर्शाते हैं कि देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की आवश्यकता है, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। यह मुद्दा केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है।



