पटना, बिहार: राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने कदमकुआं थाने के एडिशनल एसएचओ (Additional SHO) अर्जुन यादव को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस घटना से बिहार पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
पुलिस अधिकारी पर यह कार्रवाई बुद्ध मूर्ति (Buddha Murti) के पास उस वक्त हुई, जब वह एक शिकायतकर्ता से अवैध धंधा चलाने की अनुमति और केस रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम ले रहा था। निगरानी विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर उसे दबोच लिया।
रिश्वतखोरी का पूरा मामला
निगरानी विभाग को शिकायत मिली थी कि दारोगा अर्जुन यादव एक व्यक्ति शमशाद आलम से 'अवैध गेसिंग' (illegal gambling) का कारोबार फिर से शुरू कराने और पुराने मामलों को निपटाने के लिए घूस मांग रहा है। आरोप है कि अर्जुन यादव ने पहले शमशाद को इसी अवैध धंधे के आरोप में जेल भिजवाया था।
जेल से बाहर आने के बाद दारोगा उस पर दोबारा धंधा शुरू करने का दबाव बना रहा था, लेकिन शर्त थी कि उसे हर महीने 'नजराना' (bribe) देना होगा। जब शमशाद ने इनकार किया, तो उसे दोबारा जेल भेजने और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई। इसी प्रताड़ना से तंग आकर शमशाद ने निगरानी मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस महकमे में हड़कंप और कानूनी कार्रवाई
पटना के पॉश इलाके में सरेराह एक एडिशनल थाना प्रभारी की गिरफ्तारी ने बिहार पुलिस की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद कदमकुआं थाने से लेकर पुलिस लाइन तक हड़कंप मच गया है। निगरानी विभाग की टीम आरोपी दारोगा अर्जुन यादव को लेकर मुख्यालय रवाना हो गई, जहां उससे गहन पूछताछ जारी है।
निगरानी ब्यूरो के डीएसपी ने बताया कि अर्जुन यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे जल्द ही विशेष निगरानी कोर्ट (Special Vigilance Court) में पेश किया जाएगा, जहां से उसे न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेजने की तैयारी है। विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस रिश्वतखोरी में अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
मुख्य हाइलाइट्स:
- आरोपी: एसआई अर्जुन यादव (एडिशनल एसएचओ, कदमकुआं थाना, पटना)।
- स्थान: बुद्ध मूर्ति, पटना।
- आरोप: अवैध गेसिंग कारोबार शुरू कराने और केस निपटाने के नाम पर रिश्वत की मांग।
- गिरफ्तारी एजेंसी: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau)।
- कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।
विशेषण और विचार (News & Views)
पटना में खाकी वर्दी पर लगा यह दाग बताता है कि सिस्टम में जड़ें जमा चुका भ्रष्टाचार कितना गहरा है। एक पुलिस अधिकारी का खुद अवैध धंधा चलाने के लिए दबाव बनाना और फिर उसके नाम पर रिश्वत मांगना, यह दर्शाता है कि कानून के रखवाले ही कैसे कानून तोड़ने वालों से हाथ मिला रहे हैं। क्या इस गिरफ्तारी से बिहार पुलिस की छवि सुधरेगी या यह सिर्फ एक बड़े खेल का छोटा मोहरा है?
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