जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मंच था, और दुनिया की निगाहें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी थीं। लेकिन इस बार सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी ही नहीं, बल्कि एक गहरा सांस्कृतिक और राजनीतिक संदेश भी देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस अंदाज़ में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया, खासकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात, वह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रदर्शन और दक्षिण भारत को साधने का एक बड़ा दांव था।
ब्रिक्स में भारत की सांस्कृतिक छाप
ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत के लिए जो पृष्ठभूमि चुनी गई थी, वह कोई सामान्य दृश्य नहीं था। यह तमिलनाडु के प्रसिद्ध रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर का भव्य चित्रण था। प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल इस मंदिर की विशेषताओं के बारे में बताया, बल्कि खुद मुस्कुराते हुए नेताओं के हाथ पकड़कर उन्हें इस सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। यह सिर्फ भारत की समृद्ध संस्कृति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल भी थी, जो भारत की पहचान को वैश्विक मंच पर और मज़बूती से स्थापित करती है।
इस दौरान, प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान भी किया, जो बताता है कि भारत अपनी परंपराओं को वैश्विक संवाद का अहम हिस्सा बनाना चाहता है।
रामेश्वरम मंदिर: सिर्फ एक पृष्ठभूमि नहीं
रामेश्वरम मंदिर का चुनाव सिर्फ सौंदर्यबोध के लिए नहीं था। यह मंदिर दक्षिण भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जो उत्तर भारत के चार धामों में से एक होने के नाते पूरे देश को जोड़ता है। इस पृष्ठभूमि के ज़रिए, पीएम मोदी ने एक तीर से कई निशाने साधे। एक तरफ उन्होंने वैश्विक नेताओं को भारत की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया, तो दूसरी तरफ दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु के लोगों को एक भावनात्मक संदेश दिया।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में, खासकर तमिलनाडु में, केंद्र की नीतियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर कुछ चिंताएं रही हैं। रामेश्वरम के माध्यम से एक राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देना, इन चिंताओं को दूर करने और सांस्कृतिक एकीकरण का प्रयास माना जा रहा है।
दक्षिण भारत का दांव और परिसीमन की सुगबुगाहट
इस सांस्कृतिक कूटनीति के साथ ही, देश में ‘परिसीमन’ (लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्गठन) की सुगबुगाहट भी फिर से तेज़ हो गई है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर दक्षिण भारत के कई राज्य, विशेषकर तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश, अपनी गहरी चिंताएं व्यक्त करते रहे हैं। उनका मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद, परिसीमन के बाद उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ेंगी, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा।
प्रधानमंत्री मोदी का रामेश्वरम पर ज़ोर देना, ऐसे में कई राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा दक्षिण भारत की इन चिंताओं को संबोधित करने और उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा में और अधिक जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह एक ऐसा संकेत हो सकता है कि केंद्र सरकार दक्षिण के राज्यों की भावनाओं को समझने और उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश कर रही है, विशेषकर आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए।
मायने और प्रभाव
प्रधानमंत्री मोदी का ब्रिक्स मंच से यह ‘दक्षिण वाला दांव’ कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
- सांस्कृतिक एकीकरण: यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर लाने के साथ-साथ, उत्तर और दक्षिण के बीच सांस्कृतिक सेतु बनाने का प्रयास है। रामेश्वरम जैसे प्रतीक का उपयोग कर, केंद्र सरकार दक्षिण भारत के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना चाहती है।
- परिसीमन की चिंताएं: दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर जो आशंकाएं हैं, उन्हें इस कदम से कुछ हद तक कम करने की कोशिश की जा सकती है। यह एक संकेत है कि सरकार इन राज्यों की भावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं कर रही है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय विमर्श का अभिन्न अंग मानती है।
- राजनीतिक संदेश: आगामी चुनावों से पहले, यह कदम दक्षिण भारत में भाजपा की पैठ बनाने और क्षेत्रीय दलों के प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यह दर्शाता है कि भाजपा अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे देश में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है।
- वैश्विक पहचान: भारत ने इस मंच से अपनी सांस्कृतिक कूटनीति के ज़रिए दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह सिर्फ एक आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि एक प्राचीन और समृद्ध सभ्यता भी है, जिसके पास साझा करने के लिए बहुत कुछ है।
कुल मिलाकर, ब्रिक्स में पीएम मोदी का यह कदम सिर्फ एक कूटनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक बहुआयामी राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश था, जिसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं, खासकर दक्षिण भारत की राजनीति और भविष्य के परिसीमन के संदर्भ में।
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