राजस्थान में स्थानीय सरकार चुनने का दूसरा बड़ा इम्तिहान पूरा हो चुका है। निकाय चुनाव 2026 के दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न तो हुआ, लेकिन जयपुर समेत कुछ इलाकों से फर्जी वोटिंग, ईवीएम की खराबी और सियासी हंगामे की खबरें भी सामने आईं। अब सबकी निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि शहरों और कस्बों की बागडोर किसके हाथ में होगी।
लाखों मतदाताओं ने किया अपने मताधिकार का प्रयोग
मंगलवार को हुए इस महत्वपूर्ण मतदान में लाखों मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुबह से ही बूथों पर मतदाताओं की कतारें देखी गईं, जो स्थानीय मुद्दों और विकास को लेकर अपनी राय देने पहुंचे थे। यह चुनाव स्थानीय स्तर पर विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जयपुर में फर्जी वोटिंग और EVM खराबी से हंगामा
हालांकि, गुलाबी नगरी जयपुर से मतदान के दौरान कुछ अप्रिय खबरें भी आईं। कई बूथों पर फर्जी वोटिंग के आरोप लगे, जिसके बाद प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। कुछ जगहों पर ईवीएम में खराबी की शिकायतें भी मिलीं, जिससे कई वोटर बिना मतदान किए ही वापस लौटने को मजबूर हुए। इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
डिप्टी CM दीया कुमारी को विरोध का सामना
जयपुर में ही डिप्टी सीएम दीया कुमारी जब मतदान करने पहुंचीं, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। बूथ के बाहर ‘UGC रोलबैक’ के नारे लगाए गए, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई। यह घटना दिखाती है कि स्थानीय चुनावों में भी बड़े मुद्दों की गूँज सुनाई देती है।
सीएम और पूर्व सीएम ने भी डाले वोट, की बयानबाजी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया और जनता से लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा सरकार पर ढाई साल में कोई काम न करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने की बात कही। दोनों नेताओं की बयानबाजी ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया।
मायने और प्रभाव
यह निकाय चुनाव सिर्फ स्थानीय सरकार चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि राजस्थान की सियासी नब्ज टटोलने का एक अहम पैमाना भी है। इन चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर आम जनता के जीवन पर असर डालते हैं, क्योंकि स्थानीय निकाय ही उनके मोहल्ले की सड़क, पानी, सफाई और बुनियादी सुविधाओं का जिम्मा संभालते हैं। जयपुर में फर्जी वोटिंग और ईवीएम की खराबी की खबरें चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। वहीं, डिप्टी सीएम के खिलाफ प्रदर्शन बताता है कि स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य और केंद्र के बड़े फैसले भी मतदाताओं के मन में अपनी जगह बनाए हुए हैं। इन परिणामों से यह भी साफ होगा कि राज्य में सत्ताधारी दल और विपक्ष की पकड़ कितनी मजबूत है, और आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए यह एक संकेत भी हो सकता है।



